नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में आम लोगों और कारोबारियों के लिए नियमों को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मास्टर प्लान 2047 के अधिसूचित होने के साथ ही राजधानी में नियमों के सरलीकरण यानी ‘डीरेगुलेशन’ का पहला चरण लागू हो गया है. एलजी तरनजीत सिंह संधू ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाकी सभी सुधारों को इसी महीने के अंत तक हर हाल में पूरा किया जाए. सरकार का जोर ऐसे नियमों को सरल बनाने पर है, जिनसे लोगों और कारोबारियों को रोजमर्रा के कामकाज में अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है.

मास्टर प्लान लागू होने के बाद जोनिंग, भवन उप नियम, सेटबैक, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर), ग्राउंड कवरेज और बिल्डिंग अप्रूवल से जुड़े छह प्रमुख नियमों में राहत दी गई है. इससे इमारतों के नक्शे पास कराने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है.
भवन नियमों में राहत
कम जोखिम वाली इमारतों के लिए थर्ड- पार्टी निरीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. इससे बिल्डिंग अप्रूवल की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है और लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सड़कों की चौड़ाई और व्यावसायिक प्लॉट से जुड़े नियमों में भी ढील दी गई है. दिल्ली के बचे हुए 48 गांवों को जल्द शहरी क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना जारी की जाएगी. इसके बाद दिल्ली में कोई ग्रामीण इलाका नहीं रहेगा.
नियम हुए आसान
कारोबार और रोजमर्रा के कामकाज को आसान बनाने के लिए एमसीडी ने दोहरे ट्रेड लाइसेंस की आवश्यकता खत्म कर दी है. दुकानों के लिए आजीवन पंजीकरण की व्यवस्था भी लागू की गई है. इससे कारोबारियों को हर बार पंजीकरण या लाइसेंस से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने की जरूरत नहीं होगी.