सोनीपत | हरियाणा में चीनी के दाम में करीब 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. करीब डेढ़ महीने पहले 42 से 45 रुपए किलो मिलने वाली चीनी अब बाजार में 62 से 65 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है. कीमत में करीब 18 से 20 रुपए प्रति किलो का उछाल आया है. चीनी कारोबारियों के मुताबिक, दाम बढ़ने की मुख्य वजह मौसम की मार है. बारिश और सूखे के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन घटा है.

दूसरी ओर मांग बढ़ने के कारण बाजार में चीनी की उपलब्धता पर दबाव पड़ा और भाव तेजी से बढ़ गए. कारोबारियों का अनुमान है कि अगले तीन महीनों में चीनी की कीमत 75 रुपए किलो तक पहुंच सकती है. उनका दावा है कि यह 50 साल में कीमतों में आया सबसे बड़ा उछाल है.
कम मात्रा में खरीदारी
बढ़े हुए दामों का असर अब आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखाई देने लगा है. 10 रुपए में मिलने वाली चाय अब 15 रुपए की हो गई है. हलवाई एसोसिएशन भी मिठाई के दाम 20 से 30 रुपए किलो तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जबकि कुछ दुकानदारों ने कीमतें बढ़ा भी दी हैं. किराना कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक चीनी खरीद रहे हैं, लेकिन पहले की तुलना में कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं.
हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री रणबीर सिंह गंगवा से गुरुवार को बाजार में चीनी के बढ़े दामों को लेकर सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि इसमें सरकार का कोई रोल नहीं है. यह पूरी तरह बाजार और मांग- आपूर्ति का विषय है.
घटा उत्पादन
शहर के थोक चीनी व्यापारी पवन गोयल के अनुसार, चीनी के बढ़ते दामों की सबसे बड़ी वजह गन्ने की कम पैदावार और चीनी का घटता उत्पादन है. उन्होंने बताया कि इस बार कई चीनी मिलों में पिछले साल की तुलना में कम चीनी तैयार हुई है. सोनीपत के अलावा गोहाना, पानीपत, असंध और करनाल समेत हरियाणा के कई क्षेत्रों की मिलों में उत्पादन प्रभावित हुआ है.
शुगर मिल के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, यह स्थिति केवल सोनीपत की नहीं, बल्कि हरियाणा की कई मिलों में है. किसानों द्वारा गन्ने की पैदावार कम करने का असर चीनी उत्पादन पर पड़ा है.
दे रहे प्राथमिकता
पवन गोयल ने बताया कि किसान धीरे- धीरे गन्ने की खेती से दूसरी फसलों की ओर जा रहे हैं. गन्ने की फसल में मेहनत और समय अधिक लगता है और भुगतान के लिए भी इंतजार करना पड़ता है. इसी वजह से कई किसान धान जैसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं. गन्ने का रकबा और उत्पादन घटने से चीनी की उपलब्धता कम हुई है. चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एथेनॉल को भी एक कारण माना जा रहा है.
करीब 33 प्रतिशत एथेनॉल बनाने में गन्ने और उसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल होता है. ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ, जिसमें 34 लाख टन गन्ने का इस्तेमाल किया गया.