ज्योतिष डेस्क | गुजरात के सौराष्ट्र तट पर द्वारका शहर और बेत द्वारका द्वीप के बीच स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. भूमिगत गर्भगृह में स्थापित यह ज्योतिर्लिंग धार्मिक आस्था के साथ अपनी पौराणिक कथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में 10वां स्थान प्राप्त है. इसे दारुकवन के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, बौने ऋषियों के समूह ‘बालखिल्य’ ने दारुकवन में लंबे समय तक भगवान शिव की कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति और धैर्य की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव उनके सामने नग्न अवस्था में प्रकट हुए. उनके शरीर पर केवल नाग थे.

कहा जाता है कि ऋषियों की पत्नियां उस तपस्वी से आकर्षित होकर अपने पतियों को छोड़ उनके पीछे चल पड़ीं. इससे ऋषि क्रोधित हो गए और उन्होंने तपस्वी को श्राप दे दिया कि उनका लिंग पृथ्वी पर गिर जाए.
पौराणिक कथा
श्राप के प्रभाव से शिवलिंग पृथ्वी पर गिर गया और पूरी दुनिया कांप उठी. इसके बाद भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने भगवान शिव से पृथ्वी को विनाश से बचाने तथा शिवलिंग को वापस लेने का अनुरोध किया. भगवान शिव ने उन्हें सांत्वना दी और अपना लिंग वापस ले लिया. इसके बाद उन्होंने दारुकावन में ज्योतिर्लिंग के रूप में सदैव रहने का वचन दिया. बता दें कि इस कथा का उल्लेख वामन पुराण के 6ठें और 45वें अध्याय में मिलता है.
80 फीट की प्रतिमा
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान शिव की 80 फीट ऊंची प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. मंदिर की वास्तुकला और यहां मौजूद मूर्तियां धार्मिक वातावरण को और खास बनाती हैं. शिव पुराण की मान्यता के अनुसार, इस पवित्र शिवलिंग की पूजा करने से विष, सांप के काटने और सांसारिक प्रलोभनों से रक्षा होती है. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक अन्य कथा दारुका नाम के राक्षस से संबंधित है. दारुका भगवान शिव का भक्त था, लेकिन उसका स्वभाव निर्दयी था. जब सुप्रिया नाम के भक्त ने उसे भगवान शिव की पूजा का सही तरीका बताने से इनकार किया तो दारुका ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया.
सुप्रिया ने कठिन परिस्थिति में भी भगवान शिव का स्मरण नहीं छोड़ा और लगातार ‘ऊं नम:शिवाय’ का जाप करता रहा. उसकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और दारुका का वध किया. मान्यता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर निवास करने का निर्णय लिया और भक्तों की रक्षा का आशीर्वाद दिया. तभी से यह स्थान नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध माना जाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Haryana E Khabar किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।