नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने और व्यावसायिक वाहनों को पर्यावरण- अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े ने बताया कि वर्ष 2025 में दिल्ली में बिके नए हल्के मालवाहकों (एन- 1 श्रेणी) में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत रही. आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दिल्ली में 14,712 नए एन-1 मालवाहक वाहन बिके.

इनमें 13,646 सीएनजी, 1,026 इलेक्ट्रिक, 35 डीजल और केवल चार पेट्रोल वाहन थे. दिल्ली में एन- 1 श्रेणी के वाहनों की कुल संख्या अब 1.06 लाख हो गई है. इनमें करीब 1.03 लाख सीएनजी और 1,980 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं.
इन शहरों में लागू होगा नियम
पिथोड़े के अनुसार, इसी बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए सीएक्यूएम ने फैसला किया है कि 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में एन- 1 श्रेणी के केवल इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों का ही नया पंजीकरण किया जाएगा. 1 जुलाई 2027 से यह नियम गुड़गांव, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में भी लागू किया जाएगा. वहीं, एनसीआर के बाकी जिलों में 1 जनवरी 2028 से नए पेट्रोल और डीजल मालवाहकों के पंजीकरण पर रोक लग जाएगी. हालांकि, इन जिलों में सीएनजी और ईवी दोनों वाहनों के नए पंजीकरण की अनुमति रहेगी.
इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार धीमी
3,500 से 7,500 किलोग्राम वजन वाले भारी मालवाहकों की एन-2 श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्थिति अभी बेहद कमजोर है. आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में दिल्ली और पूरे एनसीआर में एक भी नया एन- 2 इलेक्ट्रिक मालवाहक नहीं बिका. इस श्रेणी में सीएनजी और डीजल वाहनों का ही दबदबा रहा. पिथोड़े ने कहा कि सीएक्यूएम का फैसला केवल वाहनों से निकलने वाले सीधे धुएं को कम करने तक सीमित नहीं है.
रिमोट कैमरों से निगरानी
प्रदूषण नियंत्रण के तहत एनसीआर के स्टोन क्रशरों पर रिमोट कैमरे, लो- कास्ट सेंसर और क्लाउड सिस्टम के जरिए निगरानी रखी जाएगी. इन इकाइयों में वाहनों के पहिए धोने की सुविधा अनिवार्य होगी. दिल्ली में चिन्हित 11 अन्य ट्रैफिक जाम वाले स्थानों को इस साल अक्टूबर तक पूरी तरह सुचारू करने की दिशा में भी काम तेजी से चल रहा है.