रेवाड़ी | नशे के खिलाफ रविवार को रेवाड़ी में आयोजित मैराथन में हजारों लोग दौड़े. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन का शुभारंभ किया और विधायकों व अधिकारियों के साथ खुद भी दौड़ में शामिल हुए. आयोजन के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह और उनके समर्थकों की गैरमौजूदगी ने अहीरवाल की सियासत में चर्चाओं को फिर हवा दे दी. CM के कार्यक्रम से राव इंद्रजीत सिंह की दूरी बनाए रखने का यह लगातार तीसरा मामला है.
इससे पहले भी अपने गृह क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में केंद्रीय राज्यमंत्री और उनके समर्थकों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही है. ऐसे में भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री और राव इंद्रजीत सिंह के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं.
कार्यक्रम में गैरमौजूदगी
मैराथन के मंच पर लगाए गए पोस्टर में मुख्यमंत्री के बाद दूसरे नंबर पर मोटे अक्षरों में केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह का नाम लिखा गया था. हालांकि, वे कार्यक्रम में नजर नहीं आए. मुख्यमंत्री से जब उनकी गैरमौजूदगी और पोस्टर में नाम को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए. अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राव तुलाराम का नाम लेकर अहीरवाल के इतिहास और क्षेत्र की भावनाओं से जुड़ने का प्रयास किया. मुख्यमंत्री के भाषण में क्षेत्र के गौरव और नशामुक्ति अभियान पर विशेष जोर रहा.
नशे से जंग…
रेवाड़ी के संग 💪#DrugsFreeHaryana pic.twitter.com/CJT5QGDNHn— Nayab Saini (@NayabSainiBJP) September 6, 2026
कांग्रेस नेताओं को किया हाउस अरेस्ट
कार्यक्रम से पहले पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कांग्रेस जिला ग्रामीण प्रधान सुभाष छाबड़ी और NSUI नेता रवि मसीत को हाउस अरेस्ट कर लिया. इससे पहले 23 अगस्त को बावल में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान भी दोनों नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया था. मैराथन में 5 और 10 किलोमीटर की दो श्रेणियां रखी गई थीं. 10 किलोमीटर की दौड़ में खिलाड़ियों और खेलों में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. आयोजन के लिए 52,745 पुरुषों और 39,093 महिलाओं ने पंजीकरण कराया था.
राजनीति के लिहाज से अहम
प्रतिभागियों को किट वितरित की गईं और अलग- अलग क्षेत्रों से आयोजन स्थल तक पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई. वाहनों के लिए पास जारी करने के साथ कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी भी लगाई गई. राव इंद्रजीत सिंह की गैरमौजूदगी को लेकर इसलिए भी चर्चा तेज है क्योंकि 30 मई और 23 अगस्त को बावल में हुए मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में भी वे और उनके समर्थक शामिल नहीं हुए थे. हालांकि, 23 अगस्त के कार्यक्रम में क्षेत्र के तीनों विधायक मौजूद रहे थे. लगातार सामने आ रही इस स्थिति को अहीरवाल की भाजपा राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
