नई दिल्ली | देश के सबसे व्यस्त रेलवे रूटों पर अब ट्रेनों की आवाजाही आसान बनाने की तैयारी तेज हो गई है. यात्री ट्रेनों के साथ बढ़ते माल ढुलाई दबाव को कम करने के लिए रेलवे 7 हाई- डेंसिटी कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से फोर- लेन करने की दिशा में काम कर रहा है. करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे इन रूटों पर रेलवे के लगभग 40 प्रतिशत ट्रैफिक का संचालन होता है. इस योजना के तहत, करीब 2 हजार किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन क्षमता पहले ही तैयार की जा चुकी है, जबकि 5 हजार किलोमीटर के काम को मंजूरी मिल चुकी है.
बाकी हिस्सों को भी चरणों में 4 लाइन वाला बनाया जाएगा. इसी कड़ी में कैबिनेट ने 9 राज्यों में आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन पर 20,804 करोड़ रुपये खर्च होंगे और वर्ष 2029- 30 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
मालगाड़ियों को फायदा
सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार नई ट्रैक क्षमता बनने से व्यस्त रूटों पर यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी. मालगाड़ियों के लिए भी बेहतर संचालन व्यवस्था तैयार होगी. 8 स्वीकृत परियोजनाओं में 3 पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से संबंधित हैं. करीब 10,783 करोड़ रुपये की इन योजनाओं से 656 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता बनेगी. इनमें खड़गपुर- झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी- पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं.
दक्षिण भारत में भी 5 प्रोजेक्ट
इन रूटों से कोयला, सीमेंट, लौह- अयस्क और इस्पात की ढुलाई को गति मिलेगी. करीब 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता और 4790 गांवों की बेहतर रेल कनेक्टिविटी तैयार होगी. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना की 5 परियोजनाओं पर करीब 10,021 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इससे लगभग 540 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता विकसित होगी. इनमें अरक्कोनम- रेनिगुंटा, व्हाइटफील्ड- बांगरपेट, होसुर- ओमालूर, सलेम- करूर- डिंडीगुल और सिकंदराबाद (घाटकेसर)- काजीपेट मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं शामिल हैं.
7 रूटों पर बढ़ेगी रफ्तार
सरकार के प्लान में दिल्ली- हावड़ा, मुंबई- हावड़ा, दिल्ली- मुंबई, दिल्ली- गुवाहाटी, दिल्ली- चेन्नई, हावड़ा- चेन्नई और मुंबई- चेन्नई हाई- डेंसिटी कॉरिडोर शामिल हैं. सभी 8 परियोजनाओं से हर साल 7.4 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने का अनुमान है. इससे कोयला, सीमेंट, इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक की आवाजाही तेज होगी.
