ज्योतिष डेस्क | पितृपक्ष का समापन सर्व पितृ अमावस्या के साथ होता है. सनातन धर्म में इस अमावस्या को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का विशेष दिन माना गया है. इस दिन श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पितृ दोष की शांति के लिए भी यह तिथि महत्वपूर्ण मानी जाती है. ज्योतिष पंडित कल्कि राम के मुताबिक, जिन लोगों की जन्म कुंडली में ग्रह नक्षत्र की स्थिति अशुभ हो, आर्थिक संकट बना रहता हो या संतान सुख में बाधा आ रही हो, उन्हें सर्व पितृ अमावस्या पर विशेष उपाय करने चाहिए.
सर्व पितृ अमावस्या पर गंगा अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान कर पितरों का तर्पण करने की परंपरा है. तिल, कुश, जौ और जल से तर्पण के बाद पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलने की मान्यता है.
पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं
इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करें और उसकी जड़ में जल अर्पित करने के बाद दीपक जलाएं. पीपल में देवी- देवताओं के साथ पितृ का भी वास होता है इसलिए यहां पूजा और दीप प्रज्वलित करना पितरों की शांति के लिए शुभ माना जाता है. अमावस्या पर गरीब ब्राह्मण को वस्त्र, अनाज, तिल, स्वर्ण, पैसा या जरूरत के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है.
चारा खिलाना शुभ
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूर्वजों का स्मरण करें. घर के आगे या छत पर घी का दीपक पितरों को समर्पित करें. भोजन से पहले कौवा और चीटियों के लिए भी भोजन निकालें. गाय को भोजन और हरा चारा खिलाना भी इस दिन शुभ माना गया है. श्रद्धा से किए गए इन कार्यों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार की सात पीढ़ियों के सुख- समृद्धि की कामना पूरी होती है.
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