नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से हावड़ा के बीच ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है. भारतीय रेलवे (Indian Railways) इस व्यस्त रेल कॉरिडोर को मिशन रफ्तार के तहत 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति के लिए तैयार कर रहा है. उत्तर मध्य रेलवे के कानपुर- मुगलसराय सेक्शन में करछना, कुरस्ती कलां और मनौरी स्थित 3 नए सब- स्टेशनों की चार्जिंग पूरी हो चुकी है. अब इन्हें संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है.
160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार हासिल करने के लिए रेलवे को कई तकनीकी व्यवस्थाओं को एक साथ मजबूत करना पड़ रहा है. मार्च 2026 में प्रयागराज- कानपुर के 190 रूट किलोमीटर हिस्से पर Kavach ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम चालू किया गया था.
3 सब- स्टेशनों का काम पूरा
यह सिस्टम खतरे की स्थिति में ट्रेन को स्वचालित रूप से रोकने और सिग्नल पार करने जैसी मानवीय गलती से बचाने में मदद करता है. आगरा मंडल में छाता ट्रैक्शन सब-स्टेशन को चार्ज किया जा चुका है. वहीं कोसीकलां, मथुरा और शोलाका में भी ट्रैक्शन पावर से जुड़े जरूरी काम पूरे किए गए हैं. ट्रैक्शन सब- स्टेशन इलेक्ट्रिक ट्रेनों को आवश्यक बिजली उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं. ट्रेन की गति बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ती है इसलिए इन व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है.
लग सकते हैं 5 घंटे कम
करीब 1525 किलोमीटर लंबा दिल्ली- हावड़ा रेल मार्ग दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ता है. इस रूट को 160 किमी प्रति घंटे की क्षमता वाला बनाने से यात्री ट्रेनों की औसत रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है. इस अपग्रेडेड इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा वंदे भारत जैसी सेमी- हाई- स्पीड ट्रेनों को भी मिल सकता है. इनके शुरू होने के बाद तेज गति से चलने वाली ट्रेनों को ज्यादा भरोसेमंद और लगातार बिजली आपूर्ति मिल सकेगी.
