नई दिल्ली, सरसों | खेती में मेहनत तो हर किसान करता है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए मेहनत के साथ सही समय और सही तरीका भी काफी मायने रखता है. अब रबी सीजन शुरू होने वाला है और किसान गेहूं के साथ सरसों की बुवाई की तैयारी भी करने लगे हैं. ऐसे में अगर आप भी अपने खेत में सरसों लगाने वाले हैं, तो बीज डालने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना आपके काम आ सकता है.
बता दें कि सरसों की बुवाई में समय, बीज की मात्रा और खेत में नमी का काफी ध्यान रखना पड़ता है. सामान्य परिस्थितियों में अक्टूबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय सरसों की बुवाई के लिए सही माना जाता है.
पहले खेत करें तैयार
सरसों की बुआई कब करनी है इसका फैसला अपने इलाके के मौसम, तापमान और सरसों की किस्म को देखकर करना चाहिए. सरसों बोने से पहले खेत की 2 से 3 बार अच्छी जुताई कर लें, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए. इसके बाद पाटा लगाकर खेत को बराबर कर लेना चाहिए. इससे सिंचाई का पानी पूरे खेत में सही तरीके से पहुंचने में मदद मिलती है. अब अगर बीज की बात करें तो सामान्य तौर पर एक एकड़ जमीन में करीब 1.5 से 2 किलो सरसों का बीज पर्याप्त हो सकता है. हालांकि, यह मात्रा किस्म और बुवाई के तरीके के हिसाब से बदल सकती है.
सरसों का बीज काफी छोटा होता है, इसलिए इसे ज्यादा गहराई में डालने से बचें. सामान्य तौर पर 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई रखी जा सकती है. वहीं, लाइन से लाइन करीब 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच करीब 10 सेंटीमीटर की दूरी रखी जा सकती है.
खाद का भी रखें ध्यान
सिर्फ सही समय पर सरसों बो देना ही काफी नहीं है. बुवाई के लिए स्वस्थ और प्रमाणित बीज का चुनाव करना भी जरूरी है. शुरुआती रोगों से बचाव के लिए बीज उपचार की सलाह दी जाती है. इसके लिए अपने क्षेत्र और किस्म के हिसाब से कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा. वहीं, खेत में खाद भी अंदाजे से डालने के बजाय मिट्टी की जांच के हिसाब से इस्तेमाल करनी चाहिए. सरसों में नाइट्रोजन और फास्फोरस के साथ सल्फर भी महत्वपूर्ण पोषक तत्व माना जाता है. सरसों की फसल में जरूरत के हिसाब से सिंचाई करनी चाहिए. खेत में लंबे समय तक ज्यादा पानी खड़ा रहने से जड़ों को नुकसान हो सकता है. ऐसा में पानी की निकासी का सही इंतजाम होना जरूरी है.
इसी तरह शुरुआती दिनों में खरपतवार को बढ़ने न दें. खरपतवार फसल के हिस्से का पानी, धूप और पोषक तत्व लेने लगते हैं. ऐसे में समय पर निराई-गुड़ाई करें. किसान खासतौर पर बहुत ज्यादा बीज डालने, बीज को ज्यादा गहराई में बोने और बिना मिट्टी की जरूरत समझे ज्यादा खाद डालने से बचें.
