रोहतक, दादा दुलीचंद | हरियाणा में चार साल पहले एक बुजुर्ग की कहानी ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा था। बुढ़ापा पेंशन कटने के विरोध में निकाली गई एक अनोखी बारात ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इस प्रदर्शन के केंद्र में रहे दादा दुलीचंद अब इस दुनिया में नहीं रहे। बता दें कि रोहतक में 106 साल के दादा दुलीचंद का निधन हो गया है। रविवार को उनके पैतृक गांव गांधरा में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

वे सांपला खंड के सबसे अधिक उम्र के बुजुर्गों में शामिल थे। साल 2022 में उनकी बुढ़ापा पेंशन काट दी गई थी, जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद ने ‘थारा फूफा है जिंदा’ अभियान चलाया था।
दूल्हा बनाकर निकाली थी बारात
साल 2022 में पेंशन की जांच के दौरान कई बुजुर्गों की पेंशन काट दी गई थी, जबकि वे जीवित थे। इसी के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया गया। उस समय 102 साल के दादा दुलीचंद को दूल्हा बनाया गया और उनकी बारात निकाली गई। इस प्रदर्शन के बाद दुलीचंद की रुकी हुई पेंशन दोबारा शुरू कर दी गई थी।
70 सदस्यों का था भरा-पूरा परिवार
दादा दुलीचंद का परिवार भी काफी बड़ा था। उनके छह बेटे और चार बेटियां हैं। परिवार में करीब 70 सदस्य हैं, जिनमें लगभग 40 पोते-पोतियां और नाती-नातिनें शामिल हैं।
दादा दुलीचंद ‘थारा फूफा है जिंदा’ अभियान के कारण लोगों के बीच खास पहचान बना चुके थे। उनके निधन से परिवार और उन्हें जानने वाले लोगों में शोक है।