भारत का एक ऐसा गांव जहां सदियों से पानी की एक-एक बूंद की जाती है संरक्षित

हिसार । देश में अंधाधुंध भूमिगत जल का उपयोग किया जा रहा है. भारत सरकार द्वारा बहुत बड़े क्षेत्र को डार्क जोन करार कर दिया गया है. सरकार ने जल का संरक्षण करने व प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए धान की बिजाई का समय निश्चित कर दिया है. सरकार के काफी प्रयासों और प्रयोगों के पश्चात भी बहुत कम कामयाबी हासिल हुई है, लेकिन भारत में ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां जलसंरक्षण की बात ही निराली है. डबवाली का रामगढ़ गांव जल संरक्षण के मामले में बहुत आगे हैं. ऐसा लगता हैं कि इस गांव का हर व्यक्ति भूमिगत जल संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है. रामगढ़ गांव के लोगों द्वारा किया जा रहा सामूहिक जल संरक्षण का प्रयास भारत सरकार और पूरे हरियाणा राज्य के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है.

WATER

डबवाली के रामगढ़ गांव में भूमिगत जल लगभग 70 से 80 फीट की गहराई में मिलता है और वहां का पानी खारा भी है. इस प्राकृतिक नियति को गांव के लोग अपनी साफ नियत से बदलने का प्रयास कर रहे हैं. रामगढ़ गांव में लगभग 400 घर हैं. हर घर में गांव के लोगों ने सोख्ता गड्ढा बनाया हुआ है. जब महिलाएं फर्श साफ करती हैं, बर्तन धोती है या अन्य काम करती हैं तो पानी बाहर गलियों में नहीं बहता बल्कि उन गड्ढों में चला जाता है.

जल एकत्र करने हेतु सोख्ता गड्ढा

गांव के ही 80 वर्षीय दानाराम जी ने बताया है कि इस गांव के लोगों को कुछ चीजें विरासत में प्राप्त हुई हैं. जल आरक्षण भी उन्हीं में से एक है. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज जैसा उनको समझा गए थे वह लोग वैसा ही कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि गांव के प्रत्येक घर में 40 फुट गहरा और 3 फुट चौड़ा सोख्ता गड्ढा बना हुआ है. यह गड्ढा लगभग 20 साल तक नहीं भरता. जब वह गड्ढा भरने वाला होता है तो उससे पहले ही दूसरा सोख्ता गड्ढा खोद दिया जाता है. उन्होंने दृढ़ विश्वास से कहा कि हमें केवल उम्मीद नहीं है बल्कि हमें पूरा विश्वास है कि हमारी मेहनत रंग लाएगी. भूमिगत पानी का स्तर ऊंचा होगा और हमारी पीढ़ियां हमारे इस प्रयास को देखकर हमें याद रखेंगी.

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सफाई के मामले में भी है आगे

भूमिगत जल के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे इस गांव को दो तरह से लाभ मिल रहा है. इंजीनियर राकेश कुलरिया ने बताया है कि इस गांव में लगभग 12 गलियां है. लेकिन किसी भी गली में नाली नहीं है. क्योंकि घरों से निकलने वाला पानी सोख्ता गड्ढा में ही इकट्ठा किया जाता है. आमतौर पर देखा जाता है कि नालियों की सफाई नहीं होती या गंदा पानी गांव की गलियों में रोड पर यूं ही बहता रहता है, गंदे पानी पर मक्खी मच्छर मंडराते रहते हैं. परंतु रामगढ़ गांव में इस प्रकार की कोई अव्यवस्था नहीं है. उन्होंने कहा है कि जल के संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छता के पैमाने पर भी हम खरे उतरे हैं.

वर्षा का जल संग्रहण तालाब में

डबवाली का रामगढ़ गांव पहले रिसालियाखेड़ा की विरासत था. लगभग तीन दशक पूर्व ही यह एक अलग पंचायत बना है. गांव के ही व्यक्ति वृद्ध दाना राम ने बताया है कि अंग्रेजों ने इस गांव में तालाब का निर्माण करवाया था. उस समय वर्षा का पानी इस तालाब में एकत्रित हो जाता है. इस गांव के आसपास के गांव रिसालियाखेड़ा, रत्ताखेड़ा, बिज्जूवाली, चकजालू, चकफरीदपुर, दारेवाला के गांव के लोग यहां से ऊंट गाड़ियों पर जल भरकर ले जाते थे.

अंग्रेजों के जाने के पश्चात भारत सरकारों ने इस तालाब की खुदाई करवा कर मूर्त का रूप दे दिया. गांव में एक भी नाली नहीं है परंतु गांव का धरातल लेवल इस प्रकार का बनाया हुआ है कि वर्षा का पानी सीधे तालाब में ही जाता है. बाद में इस पाने का उपयोग खेती के कार्यों को करने के लिए किया जाता है.

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Sahil Maurya
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