अंबाला | बढ़ती टेक्नोलॉजी के युग में नई- नई चीजों का आविष्कार हो रहा है. ऐसा ही कमाल हरियाणा में अंबाला जिले की दो बेटियों ने किया है. बता दें कि राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान अंबाला के कंप्यूटर इंजीनियरिंग शाखा की छात्राओं ने एक ऐसा इनोवेशन तैयार किया है, जो दृष्टिहीन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है. इन छात्रों ने एक ‘जादुई छड़ी’ का विकास किया है, जो रास्ते में आने वाले खतरे की जानकारी पहले ही दे देती है. इस छड़ी को बनाने का उद्देश्य नेत्रहीन लोगों को बिना किसी सहारे के सुरक्षित तरीके से चलने में मदद करना है.

ऐसे काम करेगी यह जादुई छड़ी
इस खास छड़ी में अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाए गए है, जिससे 2 मीटर की दूरी तक सामने आने वाली बाधा जैसे की कोई दीवार, गढ्ढा, वाहन सामने आती है, तो सेंसर उन्हें पहचान लेते है और छड़ी तुरंत बीप की आवाज या वाइब्रेशन के जरिए यूजर को सचेत कर देती है. इससे दृष्टिहीन व्यक्ति को पहले ही खतरे का अंदाजा हो जाएगा और वह अपना रास्ता बदल लेगा.
इस स्मार्ट छड़ी की सबसे खास बात इसकी अर्ली वार्निंग तकनीक है. आम छड़ियों में व्यक्ति को रुकावट का तब पता चलता है, जब छड़ी किसी चीज से टकराती है, लेकिन स्मार्ट छड़ी पहले ही व्यक्ति को अलर्ट कर देती है. इससे दुर्घटना का खतरा कम हो जाता है.
इतना आया खर्चा
छात्राओं ने कहा कि उन्होंने यह प्रोजेक्ट समाज में दृष्टिहीन लोगों की समस्याओं को देखकर तैयार किया है. इस छड़ी के निर्माण में प्लास्टिक पाइप, सेंसर, सॉफ्टवेयर, बैटरी, लाइटिंग सिस्टम और बीप साउंड मॉड्यूल का उपयोग किया गया है, जिस पर 7 से 8 हजार रूपए खर्चा आया है. इसकी बैटरी को चार्ज करके इसे लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता है. छात्राओं ने कहा कि उनका उद्देश्य इस छड़ी के जरिए दृष्टिहीन लोगों की मदद करना है. वे चाहती है कि जल्द से जल्द इस स्मार्ट छड़ी को बाजार में लाया जाए, ताकि दृष्टिहीन लोगों को इसका लाभ मिल सके.