भिवानी | हरियाणा की धरती से देश की सेना में जाने वाले जवानों और अधिकारियों की कोई कमी नहीं है. यहां कई ऐसे गांव हैं, जहां एक ही परिवार की कई पीढ़ियां देश की सेवा कर चुकी हैं. भिवानी जिले का बापोड़ा गांव भी अपनी इसी पहचान के लिए जाना जाता है. अब इस गांव की एक बहू ने अपनी मेहनत और हिम्मत से देशभर में अलग पहचान बनाई है. हम बात कर रहे हैं भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह की, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश ने सैन्य कार्रवाई की जानकारी देते हुए देखा था.

व्योमिका सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली हैं, लेकिन उनका ससुराल हरियाणा के भिवानी जिले के बापोड़ा गांव में है. उनके पति दिनेश सिंह सभ्रवाल भी भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर हैं. व्योमिका की उपलब्धियों को लेकर गांव के लोगों और उनके परिवार में खास गर्व है.
छठी में देखा था सपना
व्योमिका सिंह के पायलट बनने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. स्कूल में छठी कक्षा के दौरान उन्हें अपने नाम का अर्थ पता चला था. उनके नाम से जुड़ा शब्द ‘व्योम’ आकाश को दर्शाता है. इसी बात ने उनके मन में उड़ान भरने का सपना जगा दिया और उन्होंने पायलट बनने का फैसला कर लिया. स्कूल की पढ़ाई के दौरान वह NCC से भी जुड़ी रहीं. आगे चलकर उन्होंने बीटेक किया और वायुसेना अकादमी, डुंडीगल में प्रशिक्षण हासिल किया. वर्ष 2004 में वह भारतीय वायुसेना में शामिल हुईं.
इसके बाद उन्होंने चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टर उड़ाए. जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के मुश्किल पहाड़ी इलाकों में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई. वर्ष 2017 में उन्हें विंग कमांडर का पद मिला और 2019 में फ्लाइंग ब्रांच में स्थायी कमीशन प्राप्त हुआ. उनके पास 2,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है.
ऑपरेशन सिंदूर से मिली पहचान
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान व्योमिका सिंह एक बार फिर चर्चा में आई थीं. पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारतीय सैन्य कार्रवाई की जानकारी देने वाली संयुक्त प्रेस वार्ता में वह शामिल थीं. इस दौरान विदेश सचिव और कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ उन्होंने देश के सामने अभियान से जुड़ी जानकारी रखी. हालांकि, इससे पहले भी वह कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी थीं.
2020 में अरुणाचल प्रदेश में मुश्किल परिस्थितियों के बीच चलाए गए नागरिक बचाव अभियान का उन्होंने नेतृत्व किया था. इसके अगले साल 2021 में वह 21,650 फीट ऊंचे माउंट मणिरंग के पर्वतारोहण अभियान का भी हिस्सा बनी थीं.
परिवार को बहू पर गर्व
इसी बीच व्योमिका सिंह की उपलब्धियों से उनके ससुराल में भी खुशी का माहौल है. उनकी बड़ी जेठानी संतोष देवी का कहना है कि व्योमिका ने यह साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. परिवार चाहता है कि गांव की दूसरी बेटियां भी उनसे प्रेरणा लेकर पढ़ाई करें और अपने सपनों को पूरा करें. वहीं, परिवार के सदस्य डॉ. अशोक, ईश्वर सिंह और एडवोकेट रामौतार सभ्रवाल भी उनकी सफलता पर गर्व जताते हैं. परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, व्योमिका अपने मायके से सशस्त्र बलों में जाने वाली पहली सदस्य हैं. उनके पिता का नाम आरएस निम है.
गांव के 2 हजार से ज्यादा लोग सेना से जुड़े
बापोड़ा गांव का सेना से काफी पुराना रिश्ता रहा है. करीब 20 हजार की आबादी वाले इस गांव में दो हजार से अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक बताए जाते हैं. पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह का संबंध भी इसी गांव से रहा है. गांव के प्रवेश द्वार पर रखा टी-55 टैंक यहां की सैन्य परंपरा की याद दिलाता है. इस टैंक का इस्तेमा