चंडीगढ़ | हरियाणा में फार्मासिस्टों के नए भर्ती नियम तैयार हो गए हैं. इसमें खास बात यह है कि संशोधित नियमों में 6 महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग का क्लॉज हटा दिया गया है. अब फार्मा के विद्यार्थियों को ट्रेनिंग के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. विभाग ने संशोधित नियमों की फाइल को सीएम ऑफिस भेज दिया है. अब सीएम सैनी से मंजूरी मिलते ही कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा और मंजूरी मिलते ही फार्मासिस्टों की भर्ती होगी.
साल 2021 के बाद से फार्मासिस्टों की भर्ती नहीं हुई है. पूर्व सीएम खट्टर की सरकार ने साल 2021 में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्ट (ग्रुप-सी) सेवा नियम, 1998 में संशोधन को मंजूरी दी थी.
यहां समझें संसोधन जानकारी
इस संशोधन के जरिए फार्मासिस्ट के पद के लिए न्यूनतम योग्यता और नाम को संशोधित किया गया है. संशोधन के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसी अधिकारी के पद पर सीधी भर्ती के लिए भौतिकी और रसायन विज्ञान के साथ 12वीं, पंडित भागवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक या हरियाणा सरकार से मान्यता प्राप्त किसी अन्य संस्थान से फार्मेसी में स्नातक (4 वर्षीय डिग्री) या फार्मेसी में स्नातक (प्रैक्टिस) या फार्मा डी (6 वर्षीय डिग्री) की शैक्षणिक योग्यता तय की गई थी. साथ ही किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल मेंफार्मेसी, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और इनडोर में फार्मासिस्ट के रूप में कम से कम 6 महीने का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया था.
राज्य सरकार ने साल 2023 में इन संशोधित नियमों के आधार पर भर्ती निकाली और मगर उसे हाईकोर्ट में चैलेंज कर दिया गया. बाद में बीजेपी सरकार को भर्तियां वापस लेनी पड़ी और उसके बाद से कोई नई भर्तियां नहीं निकाली गई है. बीफार्मा के कई विद्यार्थियों और सीनियर फार्मासिस्टों ने इन नियमों का विरोध किया और दोबारा से इन नियमों में संशोधन की मांग की.
2 फरवरी को मिलेगी खुशखबरी
विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा था तब स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने बताया कि नियमों में संशोधन किया जा रहा है. संभावना जताई जा रही है कि 2 फरवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इन नियमों को रखा जा सकता है. 50 फीसदी पद खाली हरियाणा में फार्मासिस्टों के करीब 50 फीसदी पद खाली हैं. राज्य में फार्मासिस्टों के कुल 1163 पद स्वीकृत हैं और इनमें से 568 पद खाली पड़े हैं.
