हरियाणा प्रदूषण बोर्ड में दो तिहाई पद खाली, बिना स्टाफ काम करना बना चुनौती

चंडीगढ़ । हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदेश में प्रदूषण पर नियंत्रण करने और इसकी मॉनिटरिंग करने के लिए कई समस्याओं का सामना कर रहा है. साल बीते जा रहे हैं लेकिन इस बोर्ड में स्टाफ की कमी बनी हुई है. जिसके कारण प्रदूषण फैलाने वाले इकाइयों पर कड़ी कार्यवाही नहीं की जा रही है . ध्यान देने की बात तो यह है कि बोर्ड में दो तिहाई के लगभग पद खाली पड़े हैं.

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बोर्ड के सामने है बड़ी चुनौती

बहुत ही जरूरी संस्थाओं एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन करने वाली संस्था के कंधों पर हरियाणा के विभिन्न भागों में प्रदूषण को कम करने प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं पर शिकंजा कसने वायु जल प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण आदि को कम करने की जिम्मेदारी है. एनसीआर का बढ़ता दायरा तथा शहरीकरण की बढ़ती नीति भी बोर्ड के सामने बड़ी चुनौती पेश कर रही है. हालांकि बोर्ड में स्टाफ की कमी है लेकिन फिर भी बोर्ड की तरफ से प्रदूषण को कम करने के लिए कई मुहिम चलाई जा रही हैं.

एसडीओ के 50 पद खाली है

बोर्ड में अभी भी एसडीओ के 70 पदों में से 50 पद खाली हैं इस तरह स्टाफ कम होने के कारण किस प्रकार प्रदूषण कम किया जा सकता है. विभाग के सामने कोर्ट के मामले,लीगल एक्शन, सेंपलिंग सहित अन्य भी कई काम होते हैं. प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में एसडीओ की भूमिका बहुत ही मुख्य होती है और फैक्ट्रियों इंडस्ट्रियल यूनिट में चेकिंग की जिम्मेदारी भी एसडीओ की होती है. अगर स्टाफ की कमी पर ध्यान दें तो 327 पद खाली पड़े हैं. कुल 68 फीसदी पदों पर भर्ती का इंतजार है. बोर्डे के ग्रुप ए में लगभग 36 पद खाली हैं. ग्रुप में कुल नहीं 60 पद हैं जिनमें से 50 से 60% तो खाली ही है. चीफ साइंटिस्ट इंजीनियर के 2 पद, पर्यावरण साइंटिस्ट के 7 पद,जबकि पर्यावरण इंजीनियर के दर्जन भर पद खाली है. आपको बता दें कि साइंटिस्ट सी के 10 में से 10 पद खाली ही है.

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Deepika Bhardwaj
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मेरा नाम दीपिका भारद्वाज है. पिछले साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar वेबसाइट पर राइटर का काम कर रही हूँ. मैं यहाँ हरियाणा व दिल्ली में निकली सरकारी और प्राइवेट नौकरी से जुड़ी जानकारी साझा कर रही हूँ.