हिसार | होली का पावन पर्व धीरे- धीरे नजदीक आ रहा है. हर जगह होली मनाने का तरीका अलग- अलग होता है, जैसे बरसाने में लठमार होली खेली जाती है वैसे हरियाणा में भी होली कुछ अलग तरीके से मनाई जाती है. आज हम हिसार जिले के कुलेरी गांव की बात करेंगे जहां एक अनोखे तरीके से होली की रस्में की जाती है. यहां होली सिर्फ रंगों और पिचकारियों से नहीं बल्कि एक विशेष युद्ध- समान रस्म के रूप में मनाई जाती है.
कोड़ामार होली खास परंपरा
कुलेरी गांव की होली कुछ खास होती है. वहां होली के दिन गांव के लोग चौराहे पर इकट्ठा होकर बड़े- बड़े कड़ाहों में रंग और पानी मिलाकर रख लेते है फिर महिलाएं रस्सी या कपड़े का कोड़ा बनाकर आती है. कड़ाहे के एक तरह पुरुष और दूसरी तरफ महिलाएं इकट्ठा हो जाती है. फिर देवर और भाभी एक- दूसरे के साथ होली खेलते है. कुलेरी गांव में इसे कोड़ामार होली कहा जाता है, जहां त्यौहार के दौरान कोड़ों की बारिश होती है.
यहां के लोग बताते है कि यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है और गांव की संस्कृति का हिस्सा है. पुरुष और महिला पारंपरिक ढंग से इसमें भाग लेते है, जिसमें हल्की मार- पीट और रीति- रिवाजों के तहत त्योहार का आनंद लिया जाता है.
बनाए जाते है खास व्यंजन
होली के खास पर्व पर घरों में पारंपरिक पकवान भी तैयार किए जाते है. हरियाणा में घर- घर में स्वादिष्ट व्यंजन जैसे मालपुर, बेसन के लड्डू, गुजिया, मठरी और शकरपारे बनते है जो त्यौहार की मिठास को ओर बढ़ा देते है. होली यहां सिर्फ रंगों का नहीं बल्कि रिश्तों और लोक संस्कृति का भी त्यौहार है.
