ज्योतिष | अबकी बार होलाष्टक के समापन और होलिका दहन के आसपास चंद्र ग्रहण पड़ने की वजह से होलिका दहन का पूरा गणित ही गड़बड़ा गया है, जिस वजह से लोगों के बीच काफी कंफ्यूजन बना हुआ है कि होलिका दहन 2 मार्च को होगा या 3 मार्च को… आज हम आपको इसी के बारे में विस्तार से जानकारी देने वाले हैं. ज्योतिष आचार्य भी अपने- अपने ज्ञान से ग्रहण कल के बाद होलिका दहन के बारे में जानकारी दे रहे हैं.
कब होगा होलिका दहन?
अधिकतर ज्योतिष आचार्य का कहना है कि 2 मार्च को होलिका दहन करना ज्यादा उचित रहेगा. वहीं, इसके विपरीत 2 मार्च को भद्रा भी रहने वाली है, इस समय होलिका दहन भी असंभव माना जाता है. इसी वजह से लोगों के बीच काफी कंफ्यूजन भी बना हुआ है.
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5:30 मिनट से हो रही है और इसका समापन अगले दिन 5:26 मिनट पर होगा. ऐसे में होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में और भद्राकाल के समाप्त होने के बाद करना ही ज्यादा अच्छा है. ऐसे में 2 मार्च की संध्या में भद्रा का प्रभाव अवश्य रहेगा किंतु इस बार भद्रा मुख का अभाव है. खगोलीय शास्त्र और वैज्ञानिकों के लिए ग्रहण काफी खास घटना मानी जाती है.
किस टाइम लगेगा चंद्र ग्रहण?
जैसे ही चंद्रमा दिखेगा तो वह ग्रहण लगा हुआ ही होगा. यह ग्रहण सिंह राशि में लगने जा रहा है. चंद्र ग्रहण मध्यान्ह 3:20 मिनट से शुरू होकर शाम 6:45 मिनट पर मोक्ष होगा जबकि सूतक काल इसे ठीक 9 घंटे पहले ही लागू हो जाएगा. क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इस वजह से इसका सूतक काल भी यहां पर लागू होगा. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता अर्थात सभी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है.
साल 2026 में लगने वाला पहला चंद्र ग्रहण न केवल भारत बल्कि अन्य देश जैसे पाकिस्तान- अफ़गानिस्तान- न्यूजीलैंड- ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देने वाला है. भारत में यह ग्रहण मात्र 20 मिनट का ही रहने वाला है.
4 मार्च को खेली जाएगी रंगों वाली होली
ज्योतिष आचार्य का मानना है कि होलिका दहन 2 मार्च को शाम 7:30 बजे से लेकर रात्रि 11:00 तक करना ज्यादा उचित रहेगा. इससे अगले दिन चंद्र ग्रहण लग जाएगा. ग्रहण में पूजा अर्चना नहीं की जाती, 3 मार्च को लगने जा रहे चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:00 से ही शुरू हो जाएगा. ऐसे में होलिका दहन 2 मार्च को किया जाना ज्यादा अच्छा रहेगा. वही रंगों वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी. ग्रहण में किसी प्रकार का कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता. इस वजह से 2 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगो वाली होली मनाई जाने ज्यादा अच्छी रहेगी.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
