ज्योतिष | महाशिवरात्रि का पावन पर्व कल यानी कि 15 फरवरी को धूमधाम से मनाया जाएगा. यह पर्व फाल्गुन महीने की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है. भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए यह पर्व किसी भी बड़े त्यौहार से कम नहीं होता. आज हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में भी जानकारी देंगे जिन्हें करके आप काफी आसानी से भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न कर सकते हैं.
महाशिवरात्रि मनाया जाएगा कल
कहा जाता है कि शिवरात्रि के दिन सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है. इस दिन भक्तों का भी मंदिर में तांता लगा रहता है. भगवान भोलेनाथ के भक्त उन्हें अलग- अलग चीज अर्पित करते हैं, आज हम आपको ऐसे ही कुछ चीजों के बारे में जानकारी देंगे जिन्हें भगवान को अर्पित करके आप भी उन्हें काफी आसानी से प्रसन्न कर सकते हैं.
अर्पित करें भोलेनाथ को यह चीजें
- गंगाजल भगवान भोलेनाथ को अर्पित करना काफी अच्छा माना जाता है. गंगाजल को पवित्रता और नई शुरुआत का प्रतीक भी कहा जाता है, गंगाजल भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने से आपको सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है.
- शिवलिंग पर धतूरा चढ़ाना काफी अच्छा माना जाता है, यह भगवान भोलेनाथ को काफी प्रिय है और भक्ति और समर्पण का भी प्रतीक है. ऐसा करने से आपके मन में नकारात्मक और गंदे विचार आने बंद हो जाते हैं.
- भगवान शिवजी को सफेद फूल काफी पसंद होते हैं. अगर आप भी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो आप उन्हें महाशिवरात्रि पर मोगरा और चमेली जैसे सफेद फूल अर्पित कर सकते हैं. इन्हें शांति और प्रेम का प्रतीक माना जाता है.
- चंदन का लेप शिवलिंग पर लगाना काफी अच्छा माना जाता है. कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ को यह काफी प्रिय है. चंदन को शांति, शुद्धता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. शिवरात्रि पर चंदन का लेप लगाने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है.
- भोलेनाथ को बेलपत्र काफी प्रिय माना जाता है और यह काफी पवित्र भी होता है. इस दिन अगर आप शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं तो भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा आप पर बरसती है.
- शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाए जाने की भी अपनी एक खास परंपरा है. ऐसा करने से व्यक्ति को जीवन में तरक्की मिलती है और सभी प्रकार की परेशानियों से भी उसे छुटकारा मिल जाता है.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
