ज्योतिष डेस्क | ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं से जोड़कर देखा जाता है, जबकि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देने वाले ग्रह माने जाते हैं. जब चंद्रमा और शनि की विशेष स्थिति बनती है तो इसे विष योग कहा जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस योग का प्रभाव उन लोगों के लिए अधिक परेशानी वाला हो सकता है, जिनके कर्म गलत हैं या मन में दूसरों के प्रति छल-कपट की भावना रहती है.
आज के आर्टिकल में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने वाले है, जिससे आप अपनी राशि के अनुसार आगे के कार्य को कर पाएंगे. हालांकि, इसपर पूरी तरह से विश्वास करना बहुत ही कठिन होगा, लेकिन मान्यताओं पर ही जीवन की सीख मिलती है…
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय पारिवारिक स्तर पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है. घर में किसी मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका है और छोटी बात भी विवाद का कारण बन सकती है. लोगों के साथ बेवजह बहस से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा. इस दौरान वाणी पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा. विष योग के प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें थोड़े काले तिल डालें.
धनु राशि
धनु राशि के जातकों को विष योग का असर कार्यक्षेत्र में महसूस हो सकता है. काम की अधिकता, लगातार डेडलाइन और मानसिक दबाव परेशान कर सकते हैं. ऐसे समय में तनाव लेने के बजाय धैर्य के साथ जिम्मेदारियां पूरी करने पर ध्यान दें. ज्योतिषीय उपाय के तौर पर 11 सितंबर को शनि देव के मंत्रों का जाप करें और शनि से जुड़ी चीजों का दान करें.
मीन राशि
मीन राशि में वक्री शनि पहले से मौजूद हैं. अब चंद्रमा की स्थिति के कारण इसका प्रभाव मन और सोच पर पड़ सकता है. जरूरत से ज्यादा सोचना और नकारात्मक विचार मानसिक परेशानी बढ़ा सकते हैं. खुद को शांत रखने के साथ सेहत का भी ध्यान रखें. उपाय के लिए शनिवार को एक पात्र में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल का छाया दान करें.
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