रेवाड़ी के 11 में से 3 महाविद्यालयों के पास नहीं है अपनी बिल्ड़िंग

एक तरफ जहाँ सरकार उच्च स्तर पर महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए कॉलेज खोलने की घोषणा कर रही है वहीं दूसरी तरफ पहले से संचालित कॉलेजों के पास अपनी छत तक नहीं है. प्रदेश के कई जिलों में कॉलेजों की यही हालत है. जहां कहीं उनके पास स्वयं की बिल्डिंग नहीं है तो कहीं पढ़ाने के लिए फैकल्टी की कमी है, विशेषकर विज्ञान संकाय में तो यह अधिक ही है.

Govt College

ऐसी ही स्थिति रेवाड़ी जिले में है जहां 11 सरकारी 3 प्राइवेट व 4 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज उच्च शिक्षा मुहैया करवाने हेतु सन्चालित हो रहे हैं. इन्हीं तीन सरकारी कॉलेजों में जिनमें रेवाड़ी ब्वायज, जाटूसाना तथा बावल गर्ल्स कॉलेज के पास अपनी बिल्डिंग तक नहीं है इसलिए ये क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में कक्षाओं का सन्चालन कर अपने कार्यों की इतिश्री कर रहे हैं.

फैकल्टी की कमी से छात्रों की पढ़ाई हो रही बाधित

इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण अधिक परेशानी छात्रों को प्रोफेसरों की कमी के चलते हो रही है. चूंकि यह परेशानी विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को ज्यादा है क्योंकि सबसे अधिक कमी इसी संकाय के प्रोफेसरों की है. शहर के सेक्टर-18 स्थित राजकीय महाविद्यालय में तीन हजार से अधिक छात्राएं नामंकित हैं. परन्तु विडम्बना यह है कि यहां पर कई सालों से फिजिक्स व जूलॉजी पढ़ाने के लिए केवल एक-एक शिक्षक है. अपितु हर कॉलेज में साइंस में बहुत कम शिक्षक हैं. यही स्थिति खरखड़ा व अन्य प्रतिष्ठित कॉलेजों में भी है जिसके चलते विद्यार्थियों को काफी परेशानी होती है.

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NAAC के तहत एक भी कॉलेज नही सी ग्रेड से ऊपर

उपयुक्त खामियों के चलते कैसे इन कॉलेजों को अच्छी रैंकिंग मिल सकती है क्योंकि कुछ कॉलेजों का तो अभी तक रजिस्ट्रेशन भी नहीं हुआ है. जबकि सी ग्रेड वाले कॉलेजों में कंवाली, नाहड़ व राजकीय कॉलेज बावल शामिल हैं जबकि अन्य कॉलेजों की कोई रैंक ही नही मिली है. इसलिये प्रशासन को पहले नई नई घोषणा करने की बजाय यहां के हालात दुरुस्त करने चाहिए ताकि जमीनी स्तर पर उनके कार्य हंसी एवं आलोचना का कारण न बनें.

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