रोहतक | हरियाणा के स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (UHSR) ने मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्सों की फीस में बड़ा बदलाव किया है. विश्वविद्यालय की नई अधिसूचना के अनुसार संशोधित फीस 1 अगस्त से लागू होगी. इसके साथ ही, अगले 5 सालों तक हर साल फीस में 10 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी भी की जाएगी. इस फैसले का मेडिकल सर्विस सेंटर ऑर्गेनाइजेशन (MSC) ने विरोध किया है और इसे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है. नई फीस के तहत MBBS, BDS, MD और MS जैसे कोर्सों की रजिस्ट्रेशन फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दी गई है.

अन्य मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्सों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दी गई है. 1 अगस्त के बाद यह नई व्यवस्था लागू होगी और इसके बाद हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि जारी रहेगी. अब फीस में इस तरह की बढ़ोतरी से छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा.
लेट फीस में भी इजाफा
विश्वविद्यालय ने लेट फीस में भी बड़ा इजाफा किया है. यदि कोई छात्र निर्धारित तिथि के 10 दिन बाद परीक्षा फॉर्म भरता है तो उसे 5,000 रुपये लेट फीस देनी होगी. वहीं परीक्षा से 24 घंटे पहले तक फॉर्म भरने पर यह लेट फीस बढ़कर 20,000 रुपये तक पहुंच सकती है. इसके अलावा डुप्लीकेट डीएमसी (Detailed Marks Certificate) जारी कराने के लिए भी अधिकतम 2,500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. फीस वृद्धि को लेकर मेडिकल सर्विस सेंटर ऑर्गेनाइजेशन (MSC) ने कड़ा विरोध जताया है. संगठन का कहना है कि पहले से ही मेडिकल शिक्षा काफी महंगी है.
हरियाणा सरकार को घेरा
इस मुद्दे पर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने भी हरियाणा सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों को सस्ती और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि लेट फीस और पेनाल्टी के नाम पर उन पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ाना. उन्होंने आरोप लगाया कि मेडिकल छात्रों से इस तरह की वसूली उचित नहीं है और सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. संगठन ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है. वहीं, फीस वृद्धि को लेकर छात्रों और विभिन्न संगठनों में नाराजगी बनी हुई है.