हरियाणा में सरकारी विभाग कैशलेस बनने में पिछड़े, 100% भुगतान होता है नकदी में

हिसार । 2 साल पहले कैशलेस सिस्टम को अपनाने की शुरुआत सबसे पहले हरियाणा ने की थी. इसके बाद देश के अन्य राज्यों ने भी इस कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा दिया. लेकिन हरियाणा के सरकारी विभागों में कैशलेस सिस्टम 2 साल पहले जँहा से शुरू हुआ था, आज भी वहीं खड़ा दिखाई दे रहा है. यहां तक कि आजकल रेहड़ियों पर भी डिजिटल पेमेंट की जा रही है. लेकिन हमारे सरकारी विभाग डिजिटल व्यवस्था को लागू करने में असमर्थ रहे हैं.

लघु सचिवालय में ऐसे काफी विभाग हैं जहां पर अभी भी नकद भुगतान लिया जाता है. कैशलेस सिस्टम की शुरुआत तत्कालीन मुख्य सचिव DS ढेसी ने की थी. इसलिए इस सिस्टम का आज यहाँ पर सुचारू रूप से चलना अनिवार्य हो जाता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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ये संस्थान कैशलेस सिस्टम लागू करने में फेल

ई दिशा: ई दिशा में प्रतिदिन स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस, 80 लर्निंग लाइसेंस, 130 विभिन्न श्रेणियों में वाहनों का ट्रांसफर आदि अनेक कार्य किए जाते हैं. फिलहाल इन सभी कामों में 100% नकदी भुगतान किया जाता है. कई बार लोगों के पास नगद पैसे नहीं होते हैं तो उन्हें ATM ढूंढने के लिए जाना पड़ता है. कुछ समय पहले यहां पर पांच-छह POS मशीनों को लगाया गया था. लेकिन अब यह सारी मशीनें बंद पड़ी हैं.

नगर निगम: नगर निगम में भी डिजिटल भुगतान ठप्प पड़ा है. यहाँ कुछ समय के लिए डिजिटल भुगतान शुरू हुआ था, लेकिन वह भी बंद हो चुका है. साथ ही रोडवेज विभाग भी स्वयं को कैशलेस नहीं कर पाया है. यहां पर भी यात्रियों को टिकटें पर्चियों पर दी जाती हैं. साथ ही हिसार में ऐसे सैकड़ों CSC केंद्र हैं जहां पर 90% भुगतान नकद किया जाता है.

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इन संस्थानों में कैशलेस सिस्टम बेहतरीन

शिक्षण संस्थान: शिक्षण संस्थानों ने 2 साल पहले नोटबंदी के समय कैशलेस सिस्टम को अपनाया था. इससे प्रशिक्षण संस्थान ने अपनी कई मुश्किलों को कम कर लिया है. पहले विद्यार्थी फीस जमा करने के लिए स्कूल-कॉलेजों में लंबी-लंबी लाइनें लगाते थे. इसके कारण समय की बहुत अधिक खपत होती थी और कई बार तो विद्यार्थी फीस भरने से वंचित भी रह जाते थे. लेकिन अब कैशलेस भुगतान करने से विद्यार्थियों को बहुत अधिक सुविधा हो गई है.

रेलवे और निजी क्षेत्र: रेलवे और निजी क्षेत्र के उपक्रमों ने डिजिटल पेमेंट माध्यम को बखूबी अपनाया है. अब रेलवे में लोगों को ऑनलाइन रेल टिकट मिल रही है तो निजी क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों तक डिजिटल पेमेंट की सेवाएं पहुंच चुकी हैं.

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Sahil Maurya
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