गुरु की मौत का बदला लेने के लिए पहलवान से अपराधी बना पपला गुर्जर, फिरौती व हत्या के दर्जनों मामले दर्ज

महेन्द्रगढ़ । विक्रम उर्फ पपला गुर्जर अपराध की दुनिया का वो नाम जिसकी दहशत का खौफ हरियाणा व राजस्थान दोनों राज्यों में समान रूप से रहा है. दोनों राज्यों में उसके खिलाफ 20 से अधिक हत्या, फिरौती, अपहरण, मारपीट करने के मामले दर्ज हैं. पपला गुर्जर कितना शातिर है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने उसे तीन बार पकड़ा लेकिन दो बार वह पुलिस की गिरफ्त से भागने में कामयाब रहा. एक बार उसके साथी महेन्द्रगढ़ कोर्ट तथा दूसरी बार बहरोड़ थाने में घुस कर छुड़वाकर लें गए. पुलिस के चंगुल से छुड़कर उसने लगातार दो मर्डर कर लोगों के बीच अपनी दहशत और बढ़ा दी. हरियाणा और राजस्थान पुलिस ने उस पर 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया हुआ था.

papla gurjer

विक्रम उर्फ पपला गुर्जर महेन्द्रगढ़ जिले के गांव खैरोली का रहने वाला है. वह बचपन से ही पहलवानी का शौक रखता था और गांव के ही शक्ति पहलवान को अपना गुरु मानता था. 4 फरवरी,2014 को अपने घर में सो रहे शक्ति पहलवान का चार लोगों ने मर्डर कर दिया था. पुलिस ने इस मर्डर केस में संदीप फौजी,चीकू,राजू और महेश पर मर्डर का केस दर्ज किया था.

अपने गुरु की मौत का बदला लेने के लिए विक्रम उर्फ पपला गुर्जर ने अपने साथी वीरेंद्र के साथ मिलकर शक्ति पहलवान की हत्यारोपी संदीप फौजी सहित परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इस हत्याकांड के बाद पपला गुर्जर का नाम हरियाणा के टॉप पांच गैंगस्टर में आने लगा.

तीन बार पुलिस गिरफ्त में रहा है पपला गुर्जर

पहली बार पपला गुर्जर को नारनौल की सीआईए टीम ने 12 फरवरी 2016 को उसके गांव के पास से अवैध हथियारों के साथ पकड़ने में सफलता हासिल की. चार लोगों की हत्या के आरोप में उसे नसीबपुर जेल में बंद कर दिया गया. 7 सितंबर 2017 को महेन्द्रगढ़ कोर्ट में पेशी के दौरान उसके साथी कोर्ट में पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर उसे भगा ले गए. ठीक दो साल बाद 6 सितंबर 2019 को बहरोड़ पुलिस ने उसे धरदबोचा और इसी दिन उसके साथी उसे छुड़वा लें गए. इसके बाद राजस्थान पुलिस ने उसको 27 जनवरी 2021 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया था.

मोबाइल का कम प्रयोग करता था

पपला वारदात करने के बाद कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था.वह अपने साथियों को भी फोन न करने के निर्देश देता था.जब कभी वह साथियों से बात करता तो सिम बदल लेता था.एक बार सिम का प्रयोग करने पर उसको तोड़कर फेंक देता था, जिसके चलते वह पुलिस की पकड़ से काफी दिनों तक बचा रहा.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.