नई दिल्ली | महंगाई ने सबकी जेब ढीली कर रखी है. इन दिनों ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध देखने को मिल रहा है. भले ही थोड़े दिनों के लिए युद्ध थम गया हो परंतु 24 दिनों तक लगातार चली इस जंग ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है अर्थात महंगाई भी तेजी से बढ़ रही है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चैन बाधित होने की वजह से व्यापारिक गतिविधियों पर भी सीधा- सीधा प्रभाव पड़ा है. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
भारत में जल्द बढ़ेगी दवाओ की कीमत
युद्ध की वजह से ही प्रीमियम पेट्रोल व इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अब अन्य सेक्टर की कंपनियों को भी लागत के मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में अब यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दवाओं की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि कंपनियां बढी हुई लागत का बोझ अक्सर ग्राहकों पर ही डाल देती है.
खबरें सामने आ रही है कि फार्मा सेक्टर के टॉप अफसर की तरफ से पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं की वजह से सॉल्वेंट्स और इंटरमीडिएट पदार्थ की कीमतों में उछाल की वजह से भारत के थोक दवा निर्माता को लागत संकट में धकेल दिया है जिससे कई इकाइयों का उत्पादन भी बंद करने तक की नौबत आ गई है.
यह रहेगी बड़ी वजह
देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली दावों में से एक दवा पेरासिटामोल है स्पष्ट संकेत है पेरासिटामोल में मौजूद घटक की कीमते हाली के हफ्तों में दुगने से भी ज्यादा हो गई है.पहले लगभग 220 रुपए प्रति किलोग्राम थी जो अब बढ़कर 550 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास हो गई है. इसका मुख्य कारण आवश्यक कच्चे माल और ऊर्जा स्रोतों की कमी को माना जा रहा है, इस वजह से आने वाले समय में आपको दवाइयां की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है अर्थात ग्राहकों को एक और बड़ा झटका लगने वाला है.
पहले से ही एलपीजी की कमी की वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लंबी- लंबी लाइन में लगने के बावजूद भी समय पर एलजी नहीं मिल पा रही है. अब दवाइयां महंगी होना परेशानियों और भी बढ़ाने वाला काम ही होने वाला है.
