मोदी सरकार ने कहा- ऑक्सीजन की कमी से देश में नहीं हुई एक भी मौत, यहां पढ़ें संसद में कोरोना की मौतों पर हुआ संग्राम

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नई दिल्ली | भारत में आई कोरोना की दूसरी लहर बेहद डरावनी थी. इस दौरान प्रतिदिन हजारों से भी अधिक लोगों ने अपनी जान गवाई. स्थिति इतनी भयावह हो चुकी थी कि श्मशान घाटों में लाशों को जलाने के लिए जगह कम पड़ गई. इस दौरान हुई अधिकतर मौतों के पीछे ऑक्सीजन की कमी को बताया गया. लेकिन बीते दिन राज्यसभा में दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों पर सरकार की तरफ से दावे के विपरीत जानकारी साझा की गई.

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20 जुलाई मंगलवार को संसद में मॉनसून सत्र के दूसरे दिन कोविड-19 महामारी चर्चा का विषय बना. इस दौरान विपक्षी पार्टियों के नेताओं द्वारा सरकार से वैक्सीन की कमी, अस्पतालों में दूसरी लहर के दौरान बेड्स की कमी और ऑक्सीजन आदि के मुद्दों पर सवाल पूछे. विपक्षी द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई है. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन (Oxygen) की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई थी. महामारी की पहली लहर के दौरान, इस जीवन रक्षक गैस की मांग 3095 मीट्रिक टन थी जो दूसरी लहर के दौरान बढ़ कर करीब 9000 मीट्रिक टन हो गई.

कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से पूछा था कि क्या यह सच है कि Covid-19 की दूसरी लहर में कई सारे कोरोना मरीज सड़क पर और अस्पताल में इसलिए मर गए क्योंकि ऑक्सीजन की किल्लत थी? साथ ही उन्होंने आरोप लगाए कि अस्पतालों में बेड की कमी, ऑक्सीजन की कमी और हर चीज की कमी थी. इस पूरी अव्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए. इसका जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है.

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सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को कोरोना के दौरान हुई मौतों के बारे में सूचित करने के लिए गाइडलाइंस दिये गये थे. किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया है कि किसी की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को पूरी मदद पहुंचाई गई. सभी राज्यों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई गई. सरकार ने बताया कि दूसरी लहर में केंद्र की ओर से 28 मई तक राज्यों को 10,250 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई की गई. सबसे ज्यादा 1200-1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन महाराष्ट्र और कर्नाटक को दी गई. जबकि, दिल्ली को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन दी गई.

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राज्यसभा में सरकार की ओर से जारी बयान के बाद विपक्षी द्वारा संसद के बाहर भी सरकार को घेरा गया. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर हमला बोला है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सत्य की भी भारी कमी थी. वही मामले को लेकर हरियाणा की कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा, झूठे बयानों के माध्यम से BJP सरकार जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है.

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कोरोना संक्रमित मरीजों को ‘सांसों’ के लिए तड़पाने वाली यह सरकार आज सरेआम सफेद झूठ बोलकर अपने दामन पर लगा नाकामी का दाग छुड़ा नहीं सकती. वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई इस जानकारी को लेकर कांग्रेस विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है. कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि वो स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएंगे. आम लोगों द्वारा भी सोशल मीडिया के तमाम माध्यमों के जरिए मामले के ऊपर अपनी प्रतिक्रियाएं दी जा रही है.

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