दिल्ली के चांदनी चौक में छिपा पांडवकालीन घंटेश्वर मंदिर, जहां अंग्रेज भी झुकाते थे सिर

नई दिल्ली | हमारे देश में अनेकों मंदिर हैं. यहां शायद ही कोई गली मोहल्ला हो, जहां पर कोई मंदिर ना हो. हर जगह आपको किसी- न- किसी देवी- देवता का मंदिर देखने को मिल ही जाता है. राजधानी दिल्ली इस मामले में थोड़ा खास है क्योंकि यहां अनेक प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर स्थित हैं. सभी को उनकी जानकारी नहीं है. ज्यादातर लोग केवल कुछ बड़े और मशहूर मंदिरों के बारे में ही जानते हैं. ज्यादातर को नहीं पता कि राजधानी की गलियों में कुछ ऐसे प्राचीन मंदिर भी हैं, जिनके आगे अंग्रेजों को भी सिर झुकाना पड़ता था.

Mahadev Temple

अंग्रेज भी टेकते थे माथा

ऐसा ही एक मंदिर है, जिसका नाम है घंटेश्वर मंदिर. इस मंदिर के नाम की वजह से ही यह जिस गली में है, उसका नाम भी घंटेश्वर गली पड़ चुका है. यहां के पंडित सुनील शुक्ला बताते हैं कि यह एक पांडव कालीन मंदिर है. अंग्रेजों के जमाने में कुछ अंग्रेज भी यहां आकर माथा टेकते थे. उन्होंने कहा कि इस मंदिर में काशी विश्वनाथ के भोलेनाथ जी खुद यहां एक रूप में कई साल पहले प्रकट हुए थे. लोग इन्हें घंटेश्वर महाराज शंभू के नाम से जानते हैं. कई ग्रंथों में भी इसका जिक्र किया गया है.

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चांदनी चौक में स्थित मंदिर

उन्होंने कहा कि एक समय पांडव भी यहां आकर पूजा करके गए थे. इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता के बारे में उन्होंने बताया कि जब यहां किसी की मनोकामना पूरी होती है, तो वह जाकर घंटियां या फिर एक बड़ा घंटा भेंट करता है. यदि आप भी इस मंदिर में कभी जाएं, तो यहां आपको छोटी- बड़ी कई घंटे लटकी हुई मिलेंगी या किसी चीज से बंधी हुई दिख जाएंगी. यह मंदिर चांदनी चौक बाजार में स्थित है.

यह मंदिर कटरा नील बाजार के अंदर घंटेश्वर गली में स्थित है. यहां पहुंचने के लिए आपको यलो मेट्रो लाइन से चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पर उतरना होगा. उसके बाद, आप यहां पहुंचने के लिए रिक्शा का सहारा ले सकते हैं. सातों दिन यह मंदिर खुला रहता है. सुबह 6:30 से लेकर दोपहर 12:30 और शाम को 4:00 से लेकर 8:00 के बीच आप यहां दर्शन करने के लिए पहुंच सकते हैं.

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Nisha Tanwar
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