नई दिल्ली | राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji) का मंदिर न केवल अपनी भव्यता, बल्कि पौराणिक मान्यताओं के कारण भी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि खाटू श्याम जी महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक हैं, जो भीम के पुत्र थे. कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश दान में लिया था और उन्हें वरदान दिया था कि कलयुग में वे श्री श्याम के नाम से पूजे जाएंगे.
खाटू श्याम जी के भक्त देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं. बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि यह मंदिर किसने बनवाया और बाबा के नाम में ‘खाटू’ शब्द क्यों जुड़ा.
सपने से शुरू हुआ मंदिर निर्माण
माना जाता है कि खाटू श्याम जी के मंदिर का निर्माण 11वीं सदी में राजा रूप सिंह चौहान और उनकी पत्नी रानी नर्मदा कंवर द्वारा करवाया गया था. एक बार राजा रूप सिंह को सपने में खाटू श्याम जी ने दर्शन दिए और उन्हें एक विशेष स्थान पर अपना शीश दबा होने की बात बताई. अगले दिन उस स्थान की खुदाई करवाई गई, जहां शीश वास्तव में मिला. इसके बाद, वहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया और खाटू श्याम बाबा की प्रतिमा की प्रतिष्ठा की गई. कुछ समय बाद एक व्यापारी द्वारा इस मंदिर का विस्तार और पुनर्निर्माण भी कराया गया.
बाबा श्याम के 10 नाम और महत्व
राजस्थान टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बर्बरीक एक अत्यंत शक्तिशाली योद्धा थे और उनकी शक्ति को देखकर भगवान श्री कृष्ण ने उनसे शीश का दान मांगा था. बर्बरीक ने बिना संकोच शीश अर्पित कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें कलयुग में ‘श्याम’ नाम से पूजे जाने का वरदान दिया.
उनका मंदिर सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित है, इसलिए उन्हें खाटू श्याम कहा जाने लगा. खाटू श्याम बाबा के कुल 10 नाम प्रसिद्ध हैं: श्याम, बर्बरीक, तीन बाणधारी, हारे का सहारा, लखदातार, श्याम बाबा, घटोत्कच पुत्र, नीलघोड़े वाला, लीलण, श्याम सरकार और बाबा श्याम.
