नूंह | हरियाणा सरकार (Haryana Govt) ने कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. CM नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा और भारत सरकार के उपक्रम ऑयल इंडिया लिमिटेड की सहयोगी इकाई ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते के तहत अंबाला, हिसार, फरीदाबाद और गुरुग्राम में Waste- to- Energy प्लांट स्थापित किए जाएंगे.
चारों नगर निगमों के कमिश्नरों और ऑयल इंडिया के एमडी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने MoU पर हस्ताक्षर किए. परियोजना के अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है.
कचरे का होगा निस्तारण
इन संयंत्रों के जरिए प्रतिदिन करीब 5,000 टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा. इससे न्यूनतम 50 मेगावाट (MW) बिजली पैदा करने का लक्ष्य है. तैयार बिजली को बिजली निगम को बेचा जाएगा. इससे एक ओर शहरों में कचरे की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी तरफ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा. परियोजना की कुल पूंजीगत लागत में 25% राशि भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अर्बन चैलेंज फंड से मिलेगी. 25% हिस्सा हरियाणा सरकार और संबंधित शहरी स्थानीय निकाय मिलकर वहन करेंगे बाकी 50% राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा निवेश की जाएगी.
कचरे का अलग- अलग इस्तेमाल
यह परियोजना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत विकसित की जा रही है. प्लांट में पहुंचने वाले कचरे की पहले छंटाई की जाएगी. गीले कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र के जरिए बायोगैस तैयार होगी. सूखे कचरे में मौजूद नॉन- रिसाइकलेबल हिस्से को Waste-to-Energy प्लांट में प्रसंस्कृत कर बिजली बनाई जाएगी.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार कचरे को समस्या से समाधान और बोझ से संसाधन में बदलने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि परियोजना से शहरों को स्वच्छ बनाने के साथ ऊर्जा के नए स्रोत विकसित होंगे. इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलेगा.
