चंडीगढ़ | हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने एक ऐतिहासिक उदाहरण पेश किया है. देश की आजादी के बाद संभवतः वह पहले ऐसे राजनेता हैं, जिन्होंने अपनी पुश्तैनी संपत्ति को पूरी तरह दान कर दिया. पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक गांव बनियानी की संपूर्ण संपत्ति को प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दिया है.
इससे पहले उन्होंने अपने पुश्तैनी मकान को गांव में पुस्तकालय बनाने के लिए दान किया था. बता दें कि उनके नाम गांव में 12 कनाल जमीन और 1350 वर्ग गज में बना हुआ एक मकान था.
विभाजन के बाद रोहतक में बसे
भारत- पाकिस्तान बंटवारे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का परिवार पाकिस्तान से रोहतक जिले के गांव निदाना में आकर बस गया था. कुछ समय बाद उन्हें रोहतक जिले के गांव बनियानी में जमीन आवंटित की गई. उनके पिता हरबंस लाल ने गांव में एक छोटी सी दुकान खोली और खेती करने लगे.
पूर्व मुख्यमंत्री का जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समर्पित रहा और उन्होंने आजीवन विवाह नहीं किया. इसी कारण गांव में उनके हिस्से में करीब 35 लाख रुपये कीमत की 12 कनाल जमीन आई. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में उनके पास 1 करोड़ 30 लाख रुपये की एफडी है, जबकि पंजाब नेशनल बैंक में 1554 रुपये और एसबीआई में 25,000 रुपये जमा हैं. उन्होंने यह सारी संपत्ति प्रधानमंत्री राहत कोष में दान कर दी. उनके इस कदम की देशभर में सराहना की जा रही है.
सादगी भरा रहा जीवन
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हमेशा सार्वजनिक जीवन में बिना निजी घर के ही रहे हैं. उनका कहना है कि पूरा प्रदेश ही उनका परिवार है और उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से राष्ट्र को समर्पित कर दिया है. वह बेहद सादगीपूर्ण जीवन जीते हैं. 1975 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए समर्पित कर दिया.
1977 में संघ से जुड़ने के बाद वह लगातार 17 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे. 1994 में उन्हें भाजपा का संगठन मंत्री बनाया गया. उनके बारे में कहा जाता है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह काफी समय तक मुख्यमंत्री आवास की रसोई में खुद अपनी चाय और खाना बनाते थे. हालांकि, धीरे- धीरे राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण उनकी यह आदत छूट गई.
