रोहतक | दीपावली पर घरों में तरह-तरह के पकवान (मिठास) बनते हैं और मिठाइयों से एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया जाता है। इसी त्योहार के बीच कई ऐसे परिवार भी हैं, जिनके लिए दो वक्त का खाना जुटाना मुश्किल होता है। ऐसे लोगों की मदद करने और भोजन की बर्बादी रोकने के लिए हरियाणा की प्रिया अरोड़ा ने एक ऐसी पहल शुरू की, जो आज हजारों लोगों का पेट भर रही है।

ग्रीन विहार कॉलोनी की रहने वाली प्रिया ने महज 17 साल की उम्र में रोटी बैंक की शुरुआत की थी। गुरु नानक गर्ल्स कॉलेज में सहेलियों के टिफिन से बची रोटियां इकट्ठा करने से शुरू हुई यह मुहिम अब शांति फाउंडेशन के माध्यम से करीब 20 हजार लोगों तक पहुंच चुकी है।
सहेलियों के टिफिन से शुरू हुई पहल
इस काम में 25 सहयोगी जुड़े हैं, जो बिना वेतन लिए समाजसेवा कर रहे हैं। प्रिया ने कॉलेज में देखा कि छात्राएं टिफिन में बची रोटियां घर ले जाती हैं। उन्होंने अपनी कक्षा से रोटियां इकट्ठा करनी शुरू कीं। तत्कालीन प्रिंसिपल और वर्तमान कॉलेज निदेशिका डॉ. विरेंद्र गांधी के सहयोग से यह अभियान पूरे कॉलेज में फैल गया। जल्द ही रोजाना करीब 500 रोटियां जुटने लगीं, जिन्हें कुष्ठ आश्रम, रेलवे स्टेशन और झुग्गी-बस्तियों में बांटा जाने लगा।
कार से फूड वैन तक पहुंचा सफर
शुरुआत में प्रिया अपनी कार से भोजन बांटती थीं। बाद में छात्राएं, पड़ोसी और पुराने सहपाठी भी जुड़ गए। 13 सितंबर 2018 को डॉ. विरेंद्र गांधी ने फूड वैन का शुभारंभ किया और अभियान को रोटी बैंक नाम दिया। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी प्रिया ने इस सेवा को जारी रखा। अब टीम होटल, धर्मशालाओं और मैरिज पैलेसों से संपर्क कर वहां बचने वाले भोजन को जरूरतमंदों तक पहुंचाती है। लोग भी फोन करके भोजन उपलब्ध होने की जानकारी देते हैं। खाना साफ तरीके से पैक करके वितरित किया जाता है। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों को राशन भी दिया जाता है, हालांकि नकद सहायता नहीं की जाती।
कोरोना काल में रोज 2200 लोगों की मदद
कोरोना महामारी के दौरान रोटी बैंक की टीम ने प्रतिदिन करीब 2000 से 2200 लोगों के भोजन की व्यवस्था की। इसके अलावा ऑक्सीजन सिलिंडर, महिलाओं को सैनिटरी पैड, वृद्धाश्रम और कुष्ठ आश्रम में कंबल तथा स्कूली बच्चों को स्टेशनरी भी उपलब्ध कराई गई। इस सामाजिक कार्य के लिए प्रिया को जिलास्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित किया जा चुका है। भोजन की बर्बादी रोककर किसी भूखे का पेट भरना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, त्योहार की असली खुशी दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने में है।