कोरोना के समय सुर्खियों में रहे गांव टिटौली में फिर होने लगी हंसी- ठिठोली

रोहतक । कोरोना महामारी की चर्चा शायद ही कभी टिटौली गांव का नाम लिए बिना पूरी हों. कोरोना काल के दौरान 50-60 लोगों को खोने का अथाह दर्द इस गांव को मिला है. गांव के लोग धीरे-धीरे अब उस बूरे दौर से उबरने लगें हैं. यें कुछ तस्वीरें कोरोना काल के दौरान सबसे ज्यादा त्रासदी झेलने वाले रोहतक जिले के गांव टिटौली की है. तस्वीरों में नन्ही सी देविका अब गली के बच्चों के साथ हंसती – खेलती हुई नजर आ रही है.

ROHTAK TITOLI NEWS

यह वहीं बिटिया है जो करीब डेढ़ महीने पहले अपने घर में कैद थी. पिछली बार जब एक न्यूज चैनल की टीम गांव में पहुंची थी तब यह बिटिया अपने घर के दरवाजे से बाहर झांक रही थी. बच्ची घर में कैद होकर रह गई थी क्योंकि कोरोना महामारी गांव में कहर बरपा रही थी और बीमारी की वजह से गांव के कई व्यक्ति अपनी जान गंवा चुके थे. अब बीमारी का प्रकोप कम हुआ तो हर कोई अपने काम में लगा हुआ है. बेटी और दूसरे बच्चों की टोलियां अब गलियों में धमाचौकडी करतीं फिर रहीं हैं. कुछ बच्चे दोपहरी में तालाब में नहाने का आनंद ले रहे थे.

प्री-मानसून की बारिश के साथ ही लोग खेतों में खरीफ फसलों की बिजाई करने में जुट गए हैं. कुछ बुजुर्ग हुक्के की गुड़गुड़ाहट के साथ बातें करते नजर आए तो कुछ लोग पेड़ों के नीचे बैठकर ताश खेलते हुए दिखाई दिए. राशन डिपो पर लगी लोगों की लंबी कतार अब गांव में सब कुछ सुखद होने की गवाही दे रही है. कुल मिलाकर सार यह है कि कोरोना महामारी के दौरान 55-60 लोगों की असामयिक मौत को झेलने के बाद अब गांव के लोगों की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है. वहीं अप्रैल-मई माह के दौरान अलग-अलग परिवारों में 16 बच्चों का जन्म भी गांव में हुआ है.

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अब नौ पोती और सात पोतों की दादी लोरी सुनाकर गांव के अथाह दर्द को भूलाने की कोशिश में है लेकिन जो जख्म इस अज्ञात बीमारी की वजह से इस गांव को मिलें हैं,उनको भुला पाना इतना आसान नहीं है. एक दिन में नौ अपनों की अर्थियों को बेसहाय और लाचार टिटौली ने कंधा दिया है. गांव के 18 युवा साथी भी इस महामारी के आगे अपनी जिंदगी की जंग हार गए. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक 8-9 लोगों की मौत कोरोना महामारी की वजह से हुई थी लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बाकी के 50 लोग किन कारणों से मरे थे.

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जिले के अंदर सबसे ज़्यादा संवेदनशील गांव होने के कारण वैक्सीन डोज में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी. फिलहाल गांव में एक भी व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव नहीं है. वहीं अब लोग कोरोना वैक्सीन की डोज लगवाने के लिए लाइन में लगे हुए हैं क्योंकि उन्हें भी मालूम हो चुका है कि अगर इस महामारी से पार पाना है तो बचाव के लिए वैक्सीन डोज लेनी होगी. गत 14 जून से गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा वैक्सीनेशन अभियान चलाया हुआ है.- डॉ कुलदीप सिंह, वरिष्ठ चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिड़ी

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