सोनीपत | हरियाणा के धोती- कुर्ता वाले सिक्स पैक पहलवान ताऊ ने दिल्ली की धरती पर सफलता का नया अध्याय लिख दिया है. बता दें कि हरियाणवी ताऊ ने दिल्ली में आयोजित हुई 42 किलोमीटर मैराथन को तय समय से पहले पूरा करते हुए अपना पहला पदक जीता. उन्होंने 31 देशों और 490 शहरों से आए धावकों के बीच धोती- कुर्ता पहनकर दौड़ लगाते हुए अपनी अलग पहचान बनाई.
42 किलोमीटर लंबी दौड़ के दौरान संजय उर्फ काला पहलवान ने अंतिम चरण में अपनी स्पीड को बढ़ाया और फिनिश लाइन से करीब 3 किलोमीटर पहले एक विदेशी अंग्रेज धावक को पीछे छोड़ते हुए मेडल जीता. पारंपरिक हरियाणवी वेशभूषा में दौड़ लगाते हुए पहलवान ताऊ ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. राष्ट्रीय राजधानी में मिली इस उपलब्धि के बाद पहलवान ताऊ का सोनीपत पहुंचने पर फूलमालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया गया. हर कोई उनकी फिटनेस व जज्बे की सराहना करते नही थक रहा था.
अखाड़े से मैराथन का सफर
गांव जठेड़ी के रहने वाले काला कभी सक्रिय पहलवान थे लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों की मजबूरी ने उन्हें इस पेशे से दूर कर दिया था लेकिन उन्होंने अपने बेटे को पहलवान बनाने की ठानी और खुद भी दोबारा से बिल्कुल देशी अंदाज में कसरत करते हुए कड़ी मेहनत शुरू कर दी. नियमित व्यायाम और संतुलित आहार की बदौलत उन्होंने 42 किलोमीटर मैराथन में दमखम दिखाया और देश- दुनिया के बेहतरीन धावकों के बीच अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए पदक जीता. इस दौड़ को पूरा करने के बाद उन्होंने एक युवा के साथ सपाटे लगाकर अपनी फिटनेस का प्रदर्शन भी किया.
ताऊ पहलवान ने बताया कि जिंदगी का पहला मेडल जीतने की अपार खुशी है. अब उनका अगला लक्ष्य 100 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन में हिस्सा लेना है. उन्होंने बताया कि रोजाना अभ्यास और अनुशासन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है.
देशी अंदाज में करते हैं कसरत
सिक्स पैक वाला यह ताऊ रोजाना 25 किलोमीटर की दौड़ और 800 सपाटे लगाता है. भरा हुआ LPG सिलेंडर, पुराने पत्थर की ओखली उठाकर और पानी से भरी बाल्टियों को भारी- भरकम मूसल में टांगकर ताऊ रोजाना देशी अंदाज में कसरत करता है.
सोशल मीडिया पर वायरल
ताऊ पहलवान ने बताया कि कुछ खिलाड़ियों ने स्टेडियम में प्रैक्टिस करते हुए की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिससे लोग उन्हें जानने लगे. फिर कुछ खिलाड़ियों के कहने पर उन्होंने खुद ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करना शुरू कर दिया. बस फिर क्या था, किसी ने उन्हें देशी पहलवान, रनिंग ताऊ और हरियाणवी सलमान खान कहना शुरू कर दिया. हालांकि, कुछ लोगों ने कमेंट में फेक बताते हुए लिखा कि कोई इस उम्र में इतनी कसरत कैसे कर सकता है. ऐसे लोगों से मैं हाथ जोड़कर कहना चाहता हूं कि आप स्टेडियम पहुंचे और गिन लो कि मैं मैदान के कितने चक्कर लगाता हूं और कितने सपाटे मारता हूं.
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संजय पहलवान ने बताया कि स्टेडियम में जाकर 20- 25 किलोमीटर की दौड़ लगाना उनके लिए वार्मअप करने जैसा ही है. वो युवाओं के साथ फर्राटा दौड़ भी लगाते हैं. सोशल मीडिया पर उनके कई ऐसे वीडियो वायरल हैं जिनमे महिला एथलीट तालियां व सीटियां बजाकर उनका हौसला बढ़ा रही हैं और किलकी मारते हुए कह रही है कि देखो वो गया पहलवान ताऊ.
पहलवान ताऊ की सेहत का राज
उन्होंने आगे बताया कि दौड़ लगाने के बाद वह ट्रैक पर ही हाथ से चलने वाली जूसर मशीन में मौसमी का जूस निकाल कर पीते हैं. मौसमी का जूस उनकी सबसे महत्वपूर्ण खुराक है. इससे वे खुद को तरोताजा महसूस करते हैं. वे युवाओं को भी यहीं सलाह देते हैं कि दूध से ज्यादा जरूरी जूस होता है. घर पर भिगोकर रखें गए करीब 75 बादामों को कुंडी में रगड़ा लगाकर पीते हैं.
