सोनीपत | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मेनेजमेंट (NIFTEM) के वैज्ञानिकों ने रिसर्च का एक नया अध्याय लिखा है. यहां के वैज्ञानिकों ने बाजरे से ऐसा मोटा चावल तैयार किया है जो मिलेट (मोटा अनाज) की श्रेणी में आता है.
5 मिनट में बनेगी खीर
NIFTEM के डायरेक्टर डॉ. हरिंदर सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने बाजरे के अलावा 2 विशेष प्रकार के चावलों को मिलाकर यह मोटा चावल तैयार किया है. इस रिसर्च को पेटेंट मिल चुका है. यह एंटी आक्साइड है और नूडल्स की तरह इस चावल की खीर बनने में मात्र 5 मिनट का समय लगेगा. इस खीर को शुगर के मरीज भी खा सकेंगे. अगले महीने तक इस चावल को बिक्री के लिए बाजार में उपलब्ध करा दिया जाएगा. अभी इसका रेट निर्धारित नहीं किया गया है.
‘कंपोजिट राइस एक्टूडेड मिलेट’
NIFTEM के वैज्ञानिक डॉ. अंकुर ओझा ने बताया कि इस चावल को बनाने में एक्सट्रूजन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इस तकनीक से अनाज को हाई प्रेशर और तापमान में डालकर नया आकार दिया जाता है. इससे चावल हल्का भूरा हो जाता है. इसका स्वाद आम चावल जैसा ही होता है. अभी बिकने वाले चावल से यह चावल लगभग 20% सस्ता होगा.
उन्होंने बताया कि इस कंपोजिट राइस में 3 मुख्य घटक शामिल किए गए हैं, जिसमें सफेद चावल, काला नमक और बाजरा तीनों को मिलाकर तैयार किया गया है. इन तीनों को एक साथ मिलाकर पीसा गया और फिर एक्सट्रूजन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके हल्के भूरे रंग के नए चावल के दाने तैयार किए गए. यह मिश्रण पूरी तरह से प्राकृतिक है और इसमें किसी भी तरह का कोई और रंग नहीं मिलाया गया है.
सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद
इस चावल से बनी खीर सेहत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित होगी. इसके एक पैकेट चावल से 5 मिनट में 6 कटोरी खीर तैयार हो सकेगी, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट होगी. खास बात यह है कि इस खीर में आयरन और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. डायबिटीज या मोटापे के चलते जो लोग सामान्य चावल नहीं खा सकते हैं, वे इस मिलेट चावल को खा सकेंगे. इस चावल के खाने से शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा नहीं रहता है.
