हरियाणा में तीन दिसंबर को हो सकती है बारिश, सक्रिय हो रहा है पश्चिमी विक्षोभ

हिसार । राज्य में मौसम आमतौर पर छह दिसंबर तक परिवर्तनशील बने रहने की संभावना है. मगर पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण राज्य के उत्तर दक्षिण क्षेत्रों में तीन दिसंबर रात्रि को कुछ एक स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना है. मंगलवार को हिसार में दिन का तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. पिछले दिनों की अपेक्षा मंगलवार को प्रदूषण कुछ कम होता दिखाई दिया.

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हिसार में पिछले कई दिनों से तापमान में गिरावट देखी जा रही है. अब तीन दिसंबर को मौसम विज्ञानियों ने बारिश की संभावना जताई है. बारिश आई तो तापमान में हल्की गिरावट भी हो सकती है. हालांकि छिटपुट बारिश की संभावना जताई जा रही है. मंगलवार को हिसार में दिन का तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. इसके साथ ही एयर क्वालिटी इंडेक्स 338 रहा. पिछले दिनों की अपेक्षा मंगलवार को प्रदूषण कुछ कम होता दिखाई दिया. हालांकि अभी भी हवा खतरनाक स्तर पर चल रही है. लेकिन बारिश आने के बाद प्रदूषण से राहत जरूर मिल सकती है.

6 दिसंबर तक मौसम रहेगा परिवर्तनशील

चौधरी चरण सिंह हरियाण कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. मदन खिचड़ ने बताया कि राज्य में मौसम आमतौर पर 6 दिसंबर तक परिवर्तनशील बने रहने की संभावना है. मगर पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव के कारण राज्य के उत्तर दक्षिण क्षेत्रों में तीन दिसंबर रात को कुछ एक स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना है. इसके बाद 5 दिसंबर को एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है जिसके आंशिक प्रभाव से 5 दिसंबर रात व छह दिसंबर को राज्य में हवा व गरजचमक के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हो सकती है. इस दौरान राज्य में दिन के तापमान में हल्की गिरावट परन्तु रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है.

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क्या है पश्चिमी विक्षोभ

पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यरेखा-क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली वह बाह्य- उष्ण कटिबंधीय आंधी है जो सर्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भागों में अकस्मात मैदानी क्षेत्रों में बारिश पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी ले आती है. यह बारिश मानसून की बरसात से अलग होती है. इनमें नमी आमतौर ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच जाती है, जबकि उष्ण कटिबंधीय आंधियों में आर्द्रता निचले वायुमंडल में बनी रहती है. भारतीय महाद्वीप में जब ऐसी आंधी हिमालय तक जा पहुंचती है तो नमी कभी-कभी बारिश के रूप में बदल जाती है. यह ईरान ईराक अफगानिस्तान होते हुए भारत में प्रवेश करते हैं. हर माहीने में पश्चिमी विक्षोभ चार से पांच बार आते हैं.

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