बर्ड फ्लू को हराने के लिए लुवास के विज्ञानी तैयार, हिसार है पूर्ण रूप से सुरक्षित

हिसार | बैक्टीरिया और वायरस से पैदा होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान यूनिवर्सिटी की राय विदेशी एक्सपर्ट भी लेते रहते हैं. लुवास के विज्ञानियों ने अनेक बड़ी बीमारियों को समाप्त करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान दिया है. अब लुवास की टीम हरियाणा में आए बर्ड फ्लू को लेकर भी पूर्ण रूप से तैयार हो चुकी है. लुवास की टीम ने यहां से पंचकूला जाकर सैंपल इकट्ठे किए हैं और उन सैम्पलों को भोपाल में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एनिमल डिजीज में भेजा है.

Lala Lajpat Rai University of Veterinary Animal Sciences Hisar Luvas

तेज़ी से तैयार की रिपोर्ट

इन सैंपल को रात में ही पंचकूला प्रशासन ने गाड़ी से हाथों हाथ भेज दिया था. यह प्रक्रिया इतनी तेजी से हुई कि सुबह-सुबह भोपाल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एनिमल डिजीज में पहुंच कर वहां के वैज्ञानिकों ने सैंपल की जांच भी आरंभ कर दी और रिपोर्ट भी तैयार करके दे दी.

इस्तेमाल की जा रही मोबाइल एंबुलेंस

बर्ड फ्लू पॉजिटिव पाए जाने के पश्चात भारत सरकार के नियमों के बेस पर आउटब्रेक का कार्य किया जाता है. लुवास के विशेष इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर जानकारियां शेयर कर रहे हैं. इसके अतिरिक्त कहीं भी जल्द से जल्द पहुंचने के लिए मोबाइल एंबुलेंस का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. इस मोबाइल एंबुलेंस में इस प्रकार की बीमारियों के दौरान इस्तेमाल होने वाली सभी चीजें मौजूद हैं.

एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैलता है बर्ड फ्लू

एवियन इनफ्लुएंजा वायरस h5 n1 के कारण बर्ड फ्लू होता है. यह एक संक्रामक वायरस वाली बीमारी है. बर्ड फ्लू इन्फ्लुएंजा टाइप-ए के वायरस के कारण होती है. यह बीमारी सामान्य तौर पर मुर्गियों जैसे पक्षियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं. यह वायरस इंसानों को भी अपना शिकार बना लेता है. बर्ड फ्लू का संक्रमण बत्तख, मोर, गीस और मुर्गी जैसे पक्षियों में बहुत तेजी से फैलता है. यह वायरस इतना अधिक हानिकारक होता है कि इससे पक्षियों और इंसानों की मृत्यु भी हो जाती है. अभी तक पक्षियों को ही बर्ड फ्लू का सबसे बड़ा कारण माना जाता रहा है. परंतु कई बार यह एक इंसान से दूसरे इंसान को भी फैल जाता है.

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हिसार बर्ड फ्लू से सुरक्षित

कई वर्षों से बर्ड फ्लू की रोकथाम पर कार्य कर रहे लुवास के डॉक्टर नरेश जिंदल ने कहा है कि बर्ड फ्लू से अभी तक हिसार बिल्कुल सुरक्षित है. यदि किसी स्थान पर मरे हुए पक्षी पाए जाते हैं तो घबराएं नहीं क्योंकि यह अवश्य नहीं है कि यह पक्षी बर्ड फ्लू की वजह से ही मरे हो. कई बार पक्षियों में ठंड के कारण इस मौसम में निमोनिया भी हो जाता है इस कारण उनकी मृत्यु हो जाती है. यदि कहीं पर मरे हुए पशु पक्षी मिलते हैं तो स्थानीय पशु पालन विभाग को सूचित किया जाए.

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Sahil Maurya
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