हिसार | हरियाणा कांग्रेस में संगठन न होने का मुद्दा एक बार फिर सुलगने लगा है. अब सीनियर विधायक अशोक अरोड़ा ने पार्टी में लंबे समय तक संगठन के न होने के मुद्दे को उठाया है. उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को उसका खामियाज़ा भुगतना पड़ा है. पिछले 10 सालों से पार्टी में संगठन नहीं बन पाया है. इस दौरान दो अध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं. वहीं, मौजूदा अध्यक्ष को भी पोने 3 साल हो चुके हैं.
बाबरिया पर फोड़ा हार का ठीकरा
विस चुनाव में मिली हार के बाद जब उनसे प्रश्न किया गया तो उन्होंने हार का ठीकरा प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया पर फोड़ दिया. वहीं सहप्रभारी जितेंद्र बघेल ने कहा कि जल्दी ही पार्टी द्वारा संगठन बना लिया जाएगा. इसके लिए हाई कमान द्वारा सूची जारी की जाएगी. बता दें कि साल 2014 में अशोक तंवर को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद, उनकी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा से खींचतान सामने आती रही.
साल 2019 में इसी खींचतान के चलते उन्होंने पार्टी को छोड़ दिया. उसके बाद कुमारी कुमारी सेलजा को अध्यक्ष का पद सौंपा. यहाँ भी पार्टी की अंदरूनी कलह नहीं रुकी. कुमारी सेलजा द्वारा मीटिंग बुलाने पर न तो भूपेंद्र हुड्डा आए ना ही कोई विधायक आया. इन सब हालातों के मद्देनज़र अप्रैल 2022 में कुमारी सेलजा ने इस्तीफा सौंप दिया.
2022 में उदयभान को सौंपी कमान
साल 2022 में उदयभान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई. पौने 3 साल बीतने के बाद भी अब संगठन नहीं बन पाया है. कुछ दिनों पहले ही उदयभान ने कहा था कि हमने कई बार पार्टी पदाधिकारी की सूची प्रभारी दीपक बाबरिया को दी है लेकिन उन्होंने इसे हाई कमान को नहीं भेजा.
कुमारी सेलजा के इस्तीफा देने के बाद कुलदीप बिश्नोई ने अध्यक्ष पद के लिए अपने दावेदारी पेश की, लेकिन भूपेंद्र हुड्डा ने उदयभान को अध्यक्ष बनवा दिया, जिससे नाराज होकर कुलदीप ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में वोट नहीं दिया. इस कारण पार्टी ने उन्हें सभी पदों से हटा दिया. आखिरकार कुलदीप बिश्नोई ने 2022 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन कर ली.
