चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से BCA और BCB उम्मीदवारों की तरफ से दायर याचिका को स्वीकार कर लिया गया है. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की तरफ से इन उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र पुराने होने की वजह से जनरल कैटेगरी में डाल दिया गया था. ऐसे में इन उम्मीदवारों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फैसला इनके हक में आया.
5 फरवरी को आया था फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके माध्यम से पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों का प्रमाण पत्र अस्वीकार कर दिया था और अधिक अंक प्राप्त कर रहें उम्मीदवारों को अनारक्षित कैटेगरी में शामिल कर लिया था. जस्टिस जगमोहन बंसल की खंडपीठ ने यह निर्णय गत 5 फरवरी को सुनाया था पर विस्तृत आदेश सोमवार को अपलोड हुआ है. खंडपीठ ने फैसले में लिखा, ‘चर्चा के आधार पर, सभी याचिकाएं स्वीकार की जाती है. विवादित आदेशों को रद्द किया जाता है.
आगे की भर्ती के लिए भी मान्य होगा सर्टिफिकेट
आगे की याचिकाएं दायर करने से बचने के लिए वह स्पष्ट किया जाता है कि इस निर्णय का लाभ उन सभी उम्मीदवारों को मिलेगा जिन्हें पिछड़ी जाति से सामान्य श्रेणी में ट्रांसफर किया गया है. ऐसे में आयोग द्वारा पिछले दिनों जो 25000 पदों पर भर्तियां की गई है उनका परिणाम प्रभावित हो सकता है. हाई कोर्ट का कहना है कि सीईटी में जो बीसी सर्टिफिकेट था आगे की भर्ती के लिए भी वह ही मान्य रहेगा.
31 मार्च तक वैध होता सर्टिफिकेट
बीसी सर्टिफिकेट एक वित्त वर्ष के लिए बनाया जाता है. खंडपीठ ने फैसले में लिखा, ‘बीसी प्रमाण पत्र का एक संक्षिप्त विवरण दिनांक 17.11.2021 की अधिसूचना और दिनांक 22.03.2022 के निर्देशों से पता चलता है कि बीसी प्रमाण पत्र जिसमें आय और संपत्ति- आधारित जानकारी जैसे क्रीमी लेयर शामिल है, वह जारी होने की तारीख से 31 मार्च तक वैलिड है. उदाहरण के लिए 01.01.2024 को जारी किया गया प्रमाण पत्र 31.03.2024 तक वैध होगा. आयकर अधिनियम 1961 के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक फैला हुआ है, जैसे 01.04.2022 से 31.03.2023 एक वित्तीय वर्ष है.
याचिकाकर्ताओं का दावा
क्रीमी लेयर का दर्जा एक वित्तीय वर्ष के दौरान परिवार द्वारा रखी गई आय और संपत्ति के आधार पर निर्धारित किया जाता है. एक व्यक्ति एक विशेष वर्ष में क्रीमी लेयर की अवधारणा के अंतर्गत नहीं आ सकता है, मगर बाद के वर्षों में आ सकता है. याचिकाकताओं का दावा है कि कोई कट ऑफ तिथि नहीं है, इसलिए प्रतिवाद ने गलती से 01.04.2023 को कट- ऑफ तिथि मान लिया है. प्रतिवादी के अनुसार, उम्मीदवारों को 31.03.2023 के बाद की तिथि का वीसी प्रमाण पत्र जमा करना जरूरी था और इसे आवेदन पत्र के साथ अपलोड किया जाना चाहिए था.
आवेदन दाखिल करने की अंतिम तिथि नहीं परिवर्तनशील
न्यायालयों ने बार- बार माना है कि विज्ञापन या निगमों में विशिष्ट शर्त के अभाव में आवेदन दाखिल करने की अंतिम तिथि को कट- ऑफ तिथि माना जाना चाहिए. इंटरव्यू या दस्तावेजों की जांच की तिथि हमेशा बदलने योग्य होती है. हालांकि, आवेदन दाखिल करने की अंतिम तिथि परिवर्तनशील नहीं है. तदनुसार आवेदन दाखिल करने की अंतिम तिथि को कट-ऑफ तिथि माना जाना चाहिए. आवेदन दाखिल करने की लास्ट डेट और दस्तावेजों/ परीक्षा की जांच की तिथि के बीच पर्याप्त डिफरेंस हो सकता है और इस बीच उम्मीदवारों की स्थिति आय/ परिसंपत्तियों में परिवर्तन के वजह से बदल सकती है.
