फरीदाबाद | हरियाणा के फरीदाबाद जिले (Faridabad District) के ऊंचा गांव के किसान प्रकाश की आर्थिक स्थिति पहले जैसी नहीं थी जैसी आज है. बीते 8 वर्षों से खेती से जुड़े प्रकाश का मानना है कि अगर समय पर बुवाई हो और मंडी में फसल के अच्छे दाम मिलें तो खेती से जबरदस्त मुनाफा कमाया जा सकता है. उन्होंने सुनपेड़ गांव में पट्टे पर जमीन लेकर खेती शुरू की है.
मेहनत के साथ मुनाफा
प्रकाश ने बताया कि उन्होंने 3 बीघा जमीन ₹27000 सालाना किराए पर ली है. इसमें से डेढ़ बीघा में वह तोरी की खेती कर रहे हैं और बाकी जमीन पर अन्य सब्जियां उगाई हैं. प्रकाश बताते हैं कि तोरी की फसल में मेहनत जरूर ज्यादा लगती है, लेकिन मुनाफा भी अच्छा होता है. खेत की तैयारी जुताई से शुरू होती है, जिसे पहले हेरो और फिर कल्टीवेटर से किया जाता है. इसके बाद, मेड़ और डोल बनाए जाते हैं और फिर बीज बोए जाते हैं. बीजों के बीच 1 से 2 फीट की दूरी रखी जाती है ताकि पौधे सही तरीके से बढ़ सकें.
इतना होता है खर्चा
अच्छी फसल के लिए खेत में कम से कम 3 से 4 बार जुताई करनी होती है. प्रकाश ने बताया कि डेढ़ बीघा में उन्होंने 6 पैकेट बीज लगाए, जिनकी कीमत प्रति पैकेट ₹230 है. इस तरह बीजों पर लगभग ₹6000 का खर्च आता है. इसके अलावा मेहनत, खाद, सिंचाई और अन्य खर्चे भी होते हैं. इस समय मंडी में तोरी ₹50 प्रति किलो के भाव बिक रही है, जिससे अच्छा मुनाफा हो रहा है.
जो किसान समय पर बुवाई करते हैं उन्हें बेहतर रेट मिलते हैं. देर से बुवाई करने पर रेट ₹5 से ₹6 किलो तक गिर जाते हैं, जिससे लागत भी निकालना मुश्किल हो जाता है. यह फसल करीब 3 महीने में तैयार हो जाती है और अक्टूबर तक चलती है. इसके बाद, किसान मौसम के अनुसार दूसरी सब्जियों की तैयारी में लग जाते हैं.
