कैथल | हरियाणा के कैथल जिले के अजीमपुर गांव के पैरा तीरंदाज हरविंदर सिंह (Harvinder Singh) को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है. हरविंदर सिंह ने पैरालंपिक तीरंदाजी में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया है. जब वह अपने पैतृक गांव लौटे तो स्थानीय लोगों ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया. फूल मालाओं से उनका सम्मान किया गया. इस उपलब्धि पर अब पूरा परिवार गर्व और खुशी से फूला नहीं समा रहा है.
पिता को बेटे पर गर्व
हरविंदर सिंह के पिता ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर बहुत गर्व है. बेटे ने सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है. वहीं, उनकी पत्नी भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा कि परिवार ने जो संघर्ष किया उसका फल आज मिला है. जब किसी को ऐसा बड़ा सम्मान मिलता है, तो दिल को सुकून और गर्व महसूस होता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हरविंदर ने अपने तीरंदाजी सफर की शुरुआत 2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला से की थी.
मेहनत से पाया ये ऐतिहासिक मुकाम
हरविंदर ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर 2018 में एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. इसके बाद, भारत सरकार ने 2021 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया. फिर 2023 में चीन में हुए एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता. 2024 में उन्होंने पैरालंपिक मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय पैरा तीरंदाज बने.
#PadmaAwards2025 – Harvinder Singh
🏅Padma Shri – Sports
📍Haryana
🔹Para-Archer from Kaithal
🔹Hit the bulls-eye earning India a Gold Medal at the 2024 Paris Olympics & Bronze at the 2020 Tokyo Olympics#PadmaAwards #PeoplesPadma #PadmaShri pic.twitter.com/im88JT0eE9— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) May 27, 2025
मुश्किल हालात में भी नहीं मानी हार
हरविंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी कमजोरी को ही ताकत बनाया. कोरोना काल में जब सारी एकेडमी बंद थीं, तब भी उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा. उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया. खेतों की जमीन को तीरंदाजी अभ्यास के लिए तैयार किया गया और वहीं पर उन्होंने दिन- रात प्रैक्टिस की. उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है.
बचपन से किया संघर्ष
हरविंदर सिंह ने बचपन में ही एक दुर्घटना के कारण विकलांगता का सामना किया. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उनके पिता खेती- बाड़ी से जुड़े थे, लेकिन बेटे की पढ़ाई और खेल के लिए हमेशा प्रेरित करते रहे. साल 2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला में दाखिले के बाद हरविंदर ने तीरंदाजी को जीवन का लक्ष्य बना लिया. लगातार मेहनत, संघर्ष और अभ्यास के बल पर उन्हें आज भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार जैसे सम्मान मिल चुके हैं.
