चंडीगढ़ | कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा जिलाध्यक्षों के पैनल पार्टी हाईकमान को सौंप दिए गए हैं, लेकिन अब तक जिलाध्यक्षों की घोषणा नहीं हो पाई है. अनुमान है कि इसमें अभी और समय लग सकता है. संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा इन नामों पर केंद्रीय पर्यवेक्षकों की राय ली जा चुकी है. अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ इन नामों पर चर्चा बाकी है. इसके बाद ही, जिलाध्यक्षों की सूची जारी की जा सकती है. मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में अभी लगभग 15 दिन का समय और लग सकता है.
निकल चुकी समयसीमा
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हरियाणा में 30 जून तक संगठन बनाने के निर्देश पार्टी प्रभारी को दिए थे. बीके हरिप्रसाद ने 15 जुलाई तक नामों के ऐलान के संकेत दिए थे, लेकिन अब यह समयसीमा भी समाप्त हो गई है. बताया गया है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा हर जिले से 6-6 दावेदारों के नाम हाईकमान को सौंपे जा चुके हैं. पार्टी द्वारा पिछले 11 वर्षों से संगठन गठन का इंतजार किया जा रहा है, जिससे जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों में निराशा व्याप्त है.
नेता पर मंथन जारी
जब अंतिम निर्णय राज्य नेताओं से चर्चा के बाद ही होना है, तो फिर केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मेहनत का क्या लाभ. कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी हाईकमान को प्रदेश नेताओं की राय के बिना ही जिलाध्यक्षों की घोषणा कर देनी चाहिए. सूत्रों के अनुसार, अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी द्वारा लिया जा सकता है.
पार्टी द्वारा प्रदेशाध्यक्ष और विधायक दल के नेता को लेकर भी मंथन किया जा रहा है. मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष चौधरी उदयभान का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. विधानसभा चुनाव के परिणाम आए काफी समय हो चुका है, लेकिन अब तक कांग्रेस विधायक दल के नेता का चयन नहीं हो पाया है.
