नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया गया. केंद्र सरकार ने नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया- 2026 (NIPU- 2026) को मंजूरी दे दी है. इसके बाद, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में यूरिया की मांग हर साल करीब 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. पिछले एक दशक में 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले छह नए यूरिया संयंत्र शुरू किए गए हैं लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है.

सरकार के अनुसार, नई निवेश नीति (NIP)- 2012 के तहत अब तक छह नई यूरिया इकाइयां स्थापित की गई हैं. इनमें 4 संयंत्र सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संयुक्त उद्यम कंपनियों (JVC) और दो निजी कंपनियों द्वारा लगाए गए हैं. अब NIPU- 2026 के जरिए इस क्षेत्र में नए निवेश को और गति मिलेगी.
3 बड़े बदलाव
- सब्सिडी की गणना के लिए फिक्स्ड कॉस्ट और वैरिएबल कॉस्ट को अलग- अलग किया जाएगा जिससे लागत का आकलन अधिक पारदर्शी होगा.
- रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) की सीमा 12 से 16 प्रतिशत तय की गई है, जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को नए प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.
- डॉलर में होने वाली फिक्स्ड लागत को 4 साल बाद भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाएगा जिससे विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम कम होगा.
🔹 Cabinet approves National Investment Policy for Urea-2026 for Atmanirbhar Bharat (NIPU-2026)
🔹 The policy will encourage new investments in the Urea sector for setting up the gas based Urea manufacturing units in the country. This will help in the achieving the goal of… pic.twitter.com/LcQWvHabKz
— PIB India (@PIB_India) July 15, 2026
बचत होने का अनुमान
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई नीति से प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र पर करीब 250 करोड़ रुपये तक की बचत होने का अनुमान है. इससे परियोजनाओं की लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा और सब्सिडी प्रबंधन अधिक स्थिर व अनुमानित बनेगा. यह नीति देश को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में अहम रहेगी.