ज्योतिष | दीपावली भले ही एक दिन मनाई जाती है, परंतु यह पर्व पूरे 5 दोनों का होता है. इसकी शुरुआत धन त्रयोदशी से शुरू होकर यमद्वितीया तक होती है. इसी वजह से इसे यमपंचक भी कहा जाता है. इन 5 दिनों में यमराज, धनवंतरी, लक्ष्मी गणेश हनुमान काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा- अर्चना करने का विशेष विधान बताया गया है. धनतेरस और अमावस्या की तिथि 25 घंटे से ज्यादा अवधि तक रहने से 5 दिवसीय दीप पर्व लगातार तीसरे साल 6 दिनों में पूरा होने वाला है.
5 दिवसीय पर्व
अबकी बार दीपावली का पावन पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा. धनतेरस के साथ ही पांच दिनों का पर्व शुरू हो जाता है, जिसकी शुरुआत 18 अक्टूबर यानी कि धनतेरस के साथ शुरू हो रही है. इसके अगले दिन नरक चतुर्दशी यानी की 19 अक्टूबर को छोटी दीपावली का पर्व मनाया जाता है. इस दिन शाम को चार बतियों वाला पुराना दीपक घर के बाहर कूड़े के ढेर में जलाए जाने की परंपरा है. कहा जाता है कि स्थान चाहे कोई भी हो शुभता का वास तो घर में हर जगह होता है, सुबह सरसों के तेल और उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए और यमराज के निमित्त तर्पण जरूर करना चाहिए.
इस प्रकार करें पूजा
धनतेरस के पावन पर्व पर भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना करने का विधान भी बताया गया है. एक तरफ वैध समाज धनवंतरी का पूजन करके सबके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है, तो दूसरी और ग्रहस्थ यमदीप जलाकर यमराज से अकाल मृत्यु टालने की प्रार्थना करते हैं. इसके बाद दीपावली का पावन पर्व मनाया जाता है सनातन धर्म में इस त्यौहार को रात के समय मनाए जाने की परंपरा है.
दीपावली के दिन सूर्य अस्त से अगले दिन सूर्य उदय के बीच की रात्रि विशेष महत्व रखती है. दीपावली का दिन तंत्र मंत्र करने वाले लोगों के लिए भी बेहद बड़ा होता है, ऐसे में आपको इस दिन थोड़ी सावधानी भी आवश्यक बरतनी चाहिए. इसके बाद अगले दिन गोवर्धन पूजा और फिर उससे अगले दिन भाई दूज का पावन पर्व मनाया जाता है.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
