चंडीगढ़ | पानी की कमी जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हरियाणा ने अब जल सुरक्षित राज्य बनने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश सरकार (Haryana Govt) द्वारा एक महत्वाकांक्षी योजना चलाई गई है, जिसके तहत आने वाले 6 सालों में 5,700 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च कर 1798 किलोमीटर नहरों का आधुनिकीकरण किया जायेगा. इसमें से 4 हजार करोड़ करोड़ रुपये विश्व बैंक द्वारा वहन किए जाएंगे. इसके साथ ही, दक्षिण हरियाणा में 80 जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जाएगा.
6 वर्षीय कार्यक्रम की दी जानकारी
बुधवार को चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी ने विश्व बैंक के प्रतिनिधियों के साथ योजना साझा करते हुए कहा कि जनवरी 2026 से इस छह वर्षीय कार्यक्रम के शुरूआत होने की उम्मीद है, जो साल 2032 तक चलेगा. उन्होंने बताया कि एकीकृत, डेटा आधारित तथा प्रदर्शन उन्मुख दृष्टिकोण से प्रदेश के सिंचाई एवं जल प्रबंधन तंत्र का कायाकल्प किया जायेगा. इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर किसानों को सिंचाई के लिए पहले के मुकाबले अधिक पानी मिलेगा.
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि जल प्रबंधन नीति में हरियाणा सरकार का यह कदम क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा, जिससे साल 2032 तक हरियाणा को देश का पहला जल सुरक्षित राज्य बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा. यह कार्यक्रम 18 जिलों में फैले 14 रणनीतिक सिंचाई कलस्टरों में सीधे तौर पर लागू किया जाएगा, जो कुल 3 लाख 63 हजार 546 हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड एरिया (CCA) को कवर करेगा. इसी तर्ज पर शेष जिलों को नाबार्ड, राज्य बजट या अन्य एजेंसियों के माध्यम से शामिल किया जायेगा.
उपचारित पानी से होगी सिंचाई
उन्होंने बताया कि गुरुग्राम, कैथल और जींद के प्रमुख सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को उपचारित कर लगभग साढ़े 11 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जाएगी. इसके अलावा, करीब 2 लाख एकड़ जलभराव प्रभावित एरिया में कृषि विभाग वर्टिकल और सब सरफेस ड्रेनेज सिस्टम विकसित करेगा, ताकि जलभराव और लवणीयता की समस्या का स्थाई समाधान किया जा सके.
