देशभर में रेलवे लाइनों पर ट्रेन दुर्घटनाओं में आएगी कमी, नई सुरक्षा कवच प्रणाली होगी स्थापित

नई दिल्ली | रेल लाइनों पर ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने एक बड़ा कदम उठाया है. इसके लिए रेलवे द्वारा देशभर की रेलवे लाइन पर ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम यानि सुरक्षा कवच प्रणाली स्थापित की जा रही है. इसके अंतर्गत, रेलवे अजमेर- दिल्ली रेलमार्ग पर भी इस सिस्टम को लागू करने जा रहा है.

RAIL TRAIN

रेलवे ने रेल लाइन पर हर 5 किलोमीटर पर टावर बनाने का काम शुरू कर दिया है. वायरलैस इस सिस्टम के लगने के बाद रेल लाइन पर सिग्नल की जानकारी ड्राइवर को इंजन के अंदर ही मिल जायेगी. इससे ट्रेन दुर्घटनाओं की संभावना बहुत कम हो जायेगी.

ड्राइवर को मिलेगी सटीक जानकारी

इन दिनों इस रेलवे रूट पर बावल से मदार अजमेर के बीच कवच सिस्टम के लिए टावर लगाने का काम किया जा रहा है. रेलवे द्वारा रेल लाइन पर मानवीय भूल या तकनीकी सिस्टम से होने वाली रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस कवच सिस्टम लगाया जा रहा है. इस सिस्टम के लगने के बाद रेलमार्ग पर ट्रेनों की स्पीड, गलत रेलमार्ग पर जाने व ट्रैक पर कोई परेशानी है तो इसकी जानकारी ड्राइवर को इस नए सिस्टम से पहले ही मिल जायेगी.

लगाए जा रहे टावर

रेलवे द्वारा इस कवच सिस्टम को लेकर इन दिनों हर 5 किलोमीटर पर टावर लगाए जा रहे है. इन टावर की रेंज साढ़े 4 किलोमीटर तक रहेगी. टावर पर कवच सिस्टम लगाया जाएगा. इसके अलावा, एक कवच स्टेशन पर लगाया जाएगा. दोनों आपस में संचार का काम करेगा. जिसमें टावर के माध्यम से स्टेशन से गुजरने वाली यात्री ट्रेनों के इंजन में ड्राइवर को पहले से ही रेलमार्ग पर सिग्नल की स्थिति कैसी है, इसकी जानकारी देगा. यदि रेलमार्ग पर किसी प्रकार की परेशानी हो, तो ड्राइवर पहले ही ट्रेन रोक दे. इस सिस्टम के लिए बावल से मदार अजमेर के बीच फाइबर केबल भी बिछाई जा रही है.

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ट्रेन गति पर रखेगा निगरानी

ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेलमार्ग पर कवच प्रणाली की तरह काम करेगा. यह सिस्टम सेंसर व ट्रैकिंग से लैस है. इस सिस्टम के माध्यम से ट्रेन कितनी रफ्तार से चल रही है, इस पर नजर रखी जाएगी. यदि ट्रेन अपनी निर्धारित रफ्तार से तेज चल रही है, तो यह सिस्टम ऑटोमेटिक तरीके से ब्रेक लगाना शुरू कर देगा. साथ ही, सिस्टम में लगे इंटरनेट व जीपीएस सिस्टम से ट्रेन के वास्तविक स्थान का पता चलेगा.

यदि रेलमार्ग पर किसी प्रकार की परेशानी है, तो फ्लैश सिग्नल से ड्राइवर को पहले ही पता चल जाएगा. यदि ट्रेन गलत ट्रैक पर जा रही है, तो सिस्टम कार्डिनल डाटा के माध्यम से ड्राइवर को इसकी पहले से सूचना मिल जाएगी.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.