सोनीपत की नन्ही पहलवान वेदिका, रोज़ाना 20 KM रनिंग से बना रही रिकॉर्ड

सोनीपत | जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे खेल- कूद और पढ़ाई तक सीमित रहते हैं उस उम्र में हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली 6 वर्षीय वेदिका अपने अनुशासन, मेहनत और जज्बे से अलग पहचान बना रही है. दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली वेदिका अनलिमिटेड रनिंग चैलेंज पूरा कर रही है और अब तक करीब 1500 किलोमीटर दौड़ चुकी है. छोटी सी उम्र में उसका लक्ष्य साफ है. वह एक सफल पहलवान बनकर अपने दिवंगत दादा का सपना पूरा करना चाहती है. वेदिका का परिवार मूल रूप से झज्जर जिले के बरहाना गांव का रहने वाला है लेकिन कई वर्षों से सोनीपत के गोविंद नगर में रह रहा है.

Vedika

उसके पिता हर्ष अहलावत एक निजी स्कूल संचालित करते हैं. परिवार में कई पीढ़ियों से पहलवानी की परंपरा रही है. वेदिका के दादा वेदपाल अहलावत भी कुश्ती से जुड़े रहे थे और वे हमेशा चाहते थे कि परिवार की अगली पीढ़ी भी इस खेल में नाम कमाए. 2018 में उनके निधन के बाद अब वेदिका उसी सपने को आगे बढ़ाने में जुटी है.

रोज की दिनचर्या

दैनिक दिनचर्या में अनुशासन का ऐसा उदाहरण कम ही देखने को मिलता है. बता दें कि वेदिका रोज सुबह 4 बजे उठती है. पहले दौड़ लगाती है और फिर कुश्ती की प्रैक्टिस करती है. परिवार के अनुसार उसने कड़ाके की सर्दी में जो रनिंग चैलेंज शुरू किया था उसे आज तक नहीं छोड़ा. पिछले 181 दिनों में वह लगातार दौड़ रही है और करीब 1500 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है. वेदिका बताती है कि उसे कुश्ती बेहद पसंद है और वह आगे चलकर पहलवान बनना चाहती है. उसका कहना है कि दादाजी हमेशा उसे मेहनत करने और पहलवान बनने के लिए प्रेरित करते थे. वह अपने कोच से रोज नए दांव- पेंच सीखती है और अभ्यास के दौरान लड़कों के साथ भी मुकाबला करती है.

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बनवाया अखाड़ा

बेटी के जुनून को देखते हुए पिता हर्ष अहलावत ने घर में ही एक छोटा अखाड़ा बनवा दिया है ताकि उसे अभ्यास के लिए दूर न जाना पड़े. यहां वह रोज कुश्ती का अभ्यास करती है. आसपास के कई बच्चे भी उसके साथ ट्रेनिंग लेने आते हैं. वेदिका की दादी रोशनी देवी बताती हैं कि पोती में गजब की ऊर्जा है. सप्ताह के सामान्य दिनों में नियमित दौड़ लगाने के अलावा वह वीकेंड पर लंबी दूरी की रनिंग भी करती है. वह सोनीपत से नरेला, पुरखास, कुंडली- सिंघु बॉर्डर और खरखौदा तक लंबी दौड़ पूरी कर चुकी है. कई बार उसकी दौड़ 20 किलोमीटर तक पहुंच जाती है.

रखती है ध्यान

खान- पान को लेकर भी परिवार पूरी सावधानी बरतता है. वेदिका गाय का दूध और देसी घी लेती है. इसके अलावा, फल और ड्राई फ्रूट्स उसकी डाइट का हिस्सा हैं. वह रोज चार केले, एक अनार और एक सेब खाती है. परिवार का कहना है कि उसे बाहर का खाना नहीं दिया जाता और पूरी तरह देसी भोजन पर ही ध्यान रखा जाता है. परिजनों के मुताबिक, वेदिका की सबसे बड़ी ताकत उसकी इच्छाशक्ति है. जब भी उससे पूछा जाता है कि आज कितने किलोमीटर दौड़ना है वह कभी पीछे नहीं हटती.

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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.