नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट में वर्ष 2019 से 2023 के दौरान दिल्ली सरकार के कई विभागों में राजस्व वसूली, प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी खर्च से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023- 24 के ऑडिट में 22 सरकारी इकाइयों की जांच की गई. इस दौरान 145 मामलों में कुल 220.59 करोड़ रुपये की कर और शुल्क संबंधी गड़बड़ियां सामने आईं.

इनमें जीएसटी, वैट, स्टांप शुल्क, मोटर वाहन कर और आबकारी से जुड़े मामलों में कम या बिना कर वसूली के मामले शामिल हैं. कैग ने कहा कि संबंधित विभागों की ओर से इन आपत्तियों पर कोई जवाब नहीं दिया गया.
सिस्टम में मिली खामियां
कैग ने ई- वे बिल प्रणाली में भी कई कमियां उजागर की हैं. जांच में ऐसे करदाता मिले जो नियमों के मुताबिक कंपोजिशन योजना के पात्र नहीं थे. कई मामलों में ई-वे बिल जारी होने के बावजूद रिटर्न दाखिल नहीं किए गए या शून्य रिटर्न जमा किए गए. वहीं, कुछ मामलों में एक ही चालान पर कई ई- वे बिल बनाए गए. रिपोर्ट में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) की जूनियर इंजीनियर भर्ती परीक्षा पर हुए 1.05 करोड़ रुपये के खर्च को भी बेकार जाने की बात कही गई है.
दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआइआइडीसी) की बापरोला स्थित ज्वेलरी पार्क और फैशन डिजाइन हब परियोजना में देरी पर भी सवाल उठाए गए हैं.
ब्याज नुकसान का अनुमान
परियोजना के लिए वर्ष 2006 में 29.45 करोड़ रुपये खर्च कर 99 साल की लीज पर जमीन ली गई थी, लेकिन करीब 18 साल बाद भी यह पूरी नहीं हो सकी. कैग ने भूमि उपयोग में बार-बार बदलाव और निर्णय लेने में देरी को इसके लिए जिम्मेदार बताया. परिवहन विभाग से जुड़ी DTC EPF ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है. अप्रैल 2020 से मार्च 2023 के बीच कर्मचारियों के पीएफ की अतिरिक्त राशि समय पर निवेश नहीं करने के कारण 5.50 करोड़ रुपये के संभावित ब्याज नुकसान का अनुमान लगाया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में दिल्ली सरकार की कुल राजस्व प्राप्ति 62,703 करोड़ रुपये रही. इसमें करीब 75.5 प्रतिशत कर राजस्व, 0.93 प्रतिशत गैर-कर राजस्व और 23.54 प्रतिशत केंद्र सरकार से मिले अनुदान का हिस्सा था.