चंडीगढ़ | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणी अकाली दल (बादल) के प्रधान सुखबीर बादल के बीच हुई मुलाकात को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की भूमिका सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी से मुलाकात से पहले सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ स्थित हरियाणा CM निवास ‘संत कबीर कुटीर’ में सीएम नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी. सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा हुई.

लोकसभा में डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण बिल पर अकाली दल के समर्थन को लेकर भी बातचीत हुई. भाजपा इन मुद्दों पर अकाली दल का समर्थन चाहती है, जबकि पंजाब की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत रखने के लिए अकाली दल को भाजपा के साथ की जरूरत महसूस हो रही है.
PM से मुलाकात का खाका
सुखबीर बादल और सीएम सैनी की बैठक में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का पूरा खाका तैयार हुआ. PMO से हरी झंडी मिलने के बाद सुखबीर बादल की पीएम मोदी के साथ बैठक तय करवाई गई. इसके बाद गुरुवार रात करीब 11 बजे सुखबीर बादल को PMO से फोन आया और वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए. अकाली दल से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सुखबीर बादल ने पंजाब के अलग- अलग विधानसभा क्षेत्रों में ‘पंजाब बचाओ रैलियां’ की थीं. इसी दौरान पार्टी ने कार्यकर्ताओं के बीच एक सर्वे भी कराया. सर्वे में सामने आया कि भाजपा के साथ गठबंधन होने पर अकाली दल के दोबारा सरकार में आने की संभावना बढ़ सकती है. वहीं, बिना गठबंधन चुनाव जीतना मुश्किल बताया गया.
वोट बैंक खिसकने की चिंता
सर्वे में अकाली दल के पंथक वोट बैंक को लेकर भी चिंता सामने आई. सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) का ग्रामीण और पंथक क्षेत्रों में आधार बढ़ने की बात सामने आई है. वहीं शिअद का ग्राफ कमजोर होने का दावा किया गया. शिअद (पुनर्सुरजीत) को भी पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है. अकाली दल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को महसूस हुआ कि उसका पंथक वोट बैंक उससे दूरी बना रहा है. ऐसे में बिना मजबूत गठबंधन के चुनाव में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
कार्यकर्ताओं से भी लिया फीडबैक
सूत्रों के मुताबिक, अकाली दल ने इसके बाद भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लेने की कोशिश की. सुखबीर बादल के करीबी नेताओं के जरिए भाजपा कार्यकर्ताओं की राय जानी गई. सूत्रों का दावा है कि फीडबैक में भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से भी गठबंधन के पक्ष में राय सामने आई. बताया गया कि दोनों दलों के कार्यकर्ता चाहते हैं कि गठबंधन हो और दोनों पार्टियों का वोट बैंक एकजुट होकर उम्मीदवारों को चुनावी फायदा पहुंचाए.