चंडीगढ़ | हरियाणा के पूर्व कांग्रेस विधायक धर्म सिंह छौक्कर की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनके घर खरीदारों को पैसा लौटाने के प्रस्ताव पर गंभीर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को 13 जुलाई तक इस मामले में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि छौक्कर और उनके बेटों की घोषित संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 36 करोड़ रुपये है जबकि वे 90 करोड़ रुपये जमा कर घर खरीदारों को भुगतान करने की बात कर रहे हैं. ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि अतिरिक्त धनराशि कहां से आएगी.

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि छौक्कर का प्रस्ताव इस शर्त पर आधारित है कि परियोजना से जुड़ी जब्त संपत्तियां पहले मुक्त की जाएं. कोर्ट ने इसे स्वतंत्र स्रोत से भुगतान की योजना को पूरा करने का प्रयास माना.
मांगा विस्तृत जवाब
कोर्ट ने ED से इस पूरे प्रस्ताव पर विस्तृत जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 तय की गई है. यह मामला महिरा ग्रुप की कंपनियों से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि गुरुग्राम की किफायती आवास परियोजनाओं महिरा होम्स- 68, महिरा होम्स- 103 और महिरा होम्स- 104 में हजारों खरीदारों से पैसे लेने के बावजूद उन्हें फ्लैट नहीं दिए गए. जांच एजेंसियों का आरोप है कि जुटाई गई रकम का उपयोग निर्माण कार्य की बजाय अन्य जगहों पर किया गया.
हुई मनी लॉन्ड्रिंग
ED के अनुसार, इस मामले में करीब 616 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, और इसी धन से कई संपत्तियां खरीदी गईं. 18 जून को दाखिल हलफनामे में छौक्कर ने दावा किया था कि महिरा होम्स- 68 और 103 परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाएगा जबकि महिरा होम्स- 104 के खरीदारों को भुगतान के लिए 90 करोड़ रुपये जमा करने की योजना है.
अदालत ने इस प्रस्ताव की व्यवहारिकता और धन के स्रोत पर सवाल खड़े कर दिए. इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट अप्रैल 2026 में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका है जिसमें अदालत ने आरोपों को गंभीर बताते हुए जांच में पर्याप्त सामग्री होने और आरोपी के फरार होने की आशंका जताई थी.