गुरुग्राम | ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़ी एक नई अपडेट सामने आई है. बता दें कि गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ने एक अध्ययन के बाद इस योजना में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है, जिसके तहत मेट्रो का दूसरा चरण भूमिगत नहीं बल्कि एलिवेटेड बनाया जाएगा. इससे समय और पैसा दोनों की बचत होगी. GMRL द्वारा जल्द ही इस फैसले की पूरी रिपोर्ट शहरी एवं आवास मंत्रालय को भेजी जाएगी.
दोगुना खर्चे से बचने की कवायद
GMRL के एक अधिकारी ने बताया कि साढ़े 31 किलोमीटर लंबे ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले चरण में 15.3 किलोमीटर हिस्से का टेंडर जारी होने के बाद काम शुरू हो चुका है. जनवरी 2026 तक बचे हुए हिस्से पर निर्माण कार्य के लिए भी टेंडर जारी कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि मेट्रो ट्रैक को भूमिगत निर्माण की स्थिति में लागत लगभग दोगुना हो जाती और साथ ही स्टेशन बनाने के लिए सड़कें खोदनी पड़ती, जिससे लोगों को लंबे समय तक ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता.
नई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और भू- तकनीकी सर्वे में लगभग 2 साल का समय ज्यादा लगता, जिससे पूरे प्रोजेक्ट में देरी तय थी. इसे देखते हुए GMRL ने भूमिगत मॉडल का अध्ययन किया, मगर व्यावहारिकता और समय- लागत विश्लेषण में एलिवेटेड मॉडल अधिक उपयुक्त पाया.
इन जगहों पर बनेंगे स्टेशन
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में जिन जगहों पर स्टेशन का निर्माण किया जाएगा उनमें सेक्टर- 7, 4, 5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर- 3, बजघेड़ा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर- 23A, उद्योग विहार Phase- 4/5 और DLF साइबर सिटी शामिल हैं.
GMRL के एक अधिकारी ने बताया कि ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और नए साल से पिलर दिखना शुरू हो जाएंगे. सेक्टर- 33 के कास्टिंग यार्ड में यू- गार्डर निर्माण तेज कर दिया गया है. निर्माण कार्य के दौरान वाहन चालकों को परेशानी से बचाने के लिए अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.
