सोनीपत | देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में से एक है महात्मा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान जहां पढ़ाई करना किसी अच्छे भविष्य से कम नहीं आंका गया है, लेकिन डॉ. श्रेयक गर्ग ने ऐसा नहीं किया. जब उसके साथ वाले मेडिकल की फील्ड में अपना करियर बना रहे थे, तब श्रेयक की आंखों में UPSC का सपना चल रहा था. उसने डॉक्टरी को किनारे रखकर UPSC परीक्षा पास करने का फैसला लिया.
श्रेयक का UPSC का सफर
UPSC सफर किसी रोलर- कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है. उसने बिना किसी तैयारी के पहला पेपर दिया जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा. इस अनुभव से उसे परीक्षा पैटर्न को समझने में सहायता मिली उसे समझ आ गया कि यहां केवल ज्ञान नहीं है बल्कि सही रणनीति की भी जरूरत है. उसके बाद उसने खूब मेहनत की जिसका नतीजा रिजल्ट में देखा गया.
UPSC प्रीलिम्स की बाधा पार करने के बाद उसने मेन्स के लिए खूब तैयारी की लेकिन मेन्स में फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वो अपनी हर हार से कुछ न कुछ सीखते रहे और आगे बढ़ते गए. उसने हार नहीं मानी बल्कि अगले प्रयास की तैयारी करने लगे.उसने मेडिकल साइंस को अपना वैकल्पिक विषय बनाया और उत्तर लिखने पर दिन- रात काम किया. उसकी मेहनत रंग लाई और UPSC में उसने 35वीं रैंक हासिल की.
3 साल के बाद ऐतिहासिक सफलता
श्रेयक गर्ग हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले है. उनके पिता दीनबंधु छोटूराम साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी मे प्रोफेसर है. श्रेयक ने 3 साल तीन प्रयास किए, उसे तीसरे प्रयास में सफलता हासिल हुई. उसने 35वीं रैंक हासिल की, वो आसानी से IAS बन सकते थे लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. श्रेयक का दृष्टिकोण बड़ा था, वो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की साख मजबूत करना चाहते थे इसीलिए उसने IAS के बजाए IFS अफसर बनना पसंद किया.
